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चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों पर सख्ती बढ़ाते हुए एक कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में सरकार ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008’ में संशोधन का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया है। इस नए संशोधन के तहत दोषियों के लिए उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
विधानसभा में पेश हुआ संशोधन बिल
सोमवार को विशेष सत्र के दौरान यह विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। सरकार का कहना है कि चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कराने की कोशिश की जाएगी। इस बिल के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
क्या हैं नए कानून के प्रमुख प्रावधान
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए सख्त सजा तय की गई है। इसमें उम्रकैद के साथ-साथ 25 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। सरकार का दावा है कि इससे धार्मिक आस्था के खिलाफ होने वाले अपराधों पर रोक लगेगी।
SGPC और सरकार आमने-सामने
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने आरोप लगाया है कि बिल को तैयार करते समय उनके सुझावों को शामिल नहीं किया गया। इस पर मंत्री हरपाल चीमा ने पलटवार करते हुए कहा कि SGPC से जुड़े प्रतिनिधि पहले से ही विधानसभा में मौजूद हैं और उन्हें बिल की जानकारी दी जा चुकी है।
पुराने बिल को छोड़ संशोधन का रास्ता
गौरतलब है कि 2025 में सरकार एक नया विधेयक लाई थी, जिसमें सभी धार्मिक ग्रंथों को शामिल कर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। हालांकि अब सरकार ने उस बिल को आगे न बढ़ाते हुए 2008 के मौजूदा कानून में ही संशोधन करने का फैसला लिया है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
विपक्ष के नेताओं ने इस बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यदि सरकार गंभीर होती तो इतने वर्षों तक इंतजार नहीं करती। वहीं विधायक परगत सिंह ने भी आरोप लगाया कि सरकार अब तक हुई घटनाओं पर ठोस कार्रवाई करने में विफल रही है।
संत समाज की प्रतिक्रिया
सिख संत बाबा सेवा सिंह ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि नए कानून से बेअदबी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले की सरकारों के समय भी कई घटनाएं हुईं, लेकिन ठोस कानून नहीं बन पाया।
बढ़ी सियासी बहस
इस विधेयक को लेकर पंजाब की राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है। जहां सरकार इसे धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा करार दे रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह बिल चर्चा के बाद किस रूप में पारित होता है।
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