Chaitra Purnima 2025: चैत्र पूर्णिमा व्रत कल, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि...

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Chaitra Purnima 2025: नई दिल्ली : चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा चैत्र महीने की अंतिम तिथि होती है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होती है, जिसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
Chaitra Purnima 2025: हनुमान जयंती का महत्व
चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। हनुमान जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों को आत्मबल, साहस और सफलता प्राप्त होती है।
Chaitra Purnima 2025: चैत्र पूर्णिमा 2025 तिथि एवं शुभ मुहूर्त
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पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल 2025, रात 3:21 बजे
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पूर्णिमा तिथि समाप्त: 13 अप्रैल 2025, सुबह 5:51 बजे
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:29 बजे से 5:14 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 बजे से 3:21 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:44 बजे से 7:06 बजे तक
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निशिता मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 12:44 बजे तक
Chaitra Purnima 2025: चैत्र पूर्णिमा की पूजा विधि
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सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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भगवान को चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत अर्पित करें और फूल, फल व मिठाई का भोग लगाएं।
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विशेष रूप से खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
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घी का दीपक जलाकर विष्णु मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
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हनुमान जयंती के अवसर पर हनुमान जी की पूजा करें, उन्हें सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल, दूध, अक्षत और फूल मिलाकर अर्घ्य दें।
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इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, अतः वस्त्र, अन्न, धन और शिक्षा से संबंधित वस्तुओं का दान करें।

Chaitra Purnima 2025: चैत्र पूर्णिमा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
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इस दिन गंगा स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
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चैत्र पूर्णिमा को किए गए जप, ध्यान और साधना से मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है।
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यह दिन चंद्रमा की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, जिससे मन की चंचलता दूर होती है और शांति की अनुभूति होती है।
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वैशाख मास की शुरुआत इसी दिन से मानी जाती है, जो हिंदू धर्म में सबसे पुण्यकारी महीना होता है।
चैत्र पूर्णिमा का व्रत और पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।


