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संगम में डुबकी के बाद महामंडलेश्वर बनीं ममता कुलकर्णी...

संगम में डुबकी के बाद महामंडलेश्वर बनीं ममता कुलकर्णी..
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संगम में डुबकी के बाद महामंडलेश्वर बनीं ममता कुलकर्णी..

ममता कुलकर्णी, जो कभी बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री थीं, अब आध्यात्मिक जीवन की राह पर हैं। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान, ममता ने एक बड़ा कदम उठाते हुए किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पदवी ग्रहण की। 52 वर्षीय ममता कुलकर्णी ने शुक्रवार को संगम में तीन बार डुबकी लगाई, अपना पिंडदान किया और फिर उन्हें अखाड़े में पट्टाभिषेक के बाद महामंडलेश्वर घोषित किया गया। इस अवसर पर उन्हें नया नाम ममता नंद गिरि दिया गया।photo Mamta Kulkarni mahakumbh Mahamandaleshwar Sangam bath Pinddaan  Pattabhishek संगम स्नान, पिंडदान, पट्टाभिषेक, ममता कुलकर्णी ऐसे बनीं  महामंडलेश्वर, देखिए तस्वीरें

बॉलीवुड से संन्यास का सफर

कभी बॉलीवुड की फेमस अदाकारा रहीं ममता कुलकर्णी ने लंबे समय पहले ग्लैमर और चकाचौंध की दुनिया को अलविदा कह दिया था। उन्होंने संन्यास लेकर साध्वी का जीवन अपना लिया। पिछले 24 सालों से भारत से दूर रहने के बाद हाल ही में वे भारत लौटीं और अब आध्यात्मिक जीवन में नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

संगम पर डुबकी और पिंडदान

महाकुंभ में शुक्रवार के दिन ममता कुलकर्णी ने संगम में तीन बार डुबकी लगाई और अपना पिंडदान किया। इसके बाद किन्नर अखाड़े में उनका पट्टाभिषेक समारोह हुआ, जिसमें उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। इस समारोह के दौरान ममता ने कहा, "यह महादेव का आदेश और महाकाली की इच्छा थी। मेरे गुरु ने यह दिन चुना। मैंने कुछ नहीं किया, यह सब ईश्वर की मर्जी है।"

किन्नर अखाड़ा: उद्देश्य और महत्व

किन्नर अखाड़ा 2015 में स्थापित एक हिंदू धार्मिक संगठन है, जिसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में समानता और मान्यता दिलाना है। ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर के रूप में नियुक्त करके किन्नर अखाड़ा अपने संदेश और प्रभाव को और अधिक फैलाने की कोशिश कर रहा है।

इस संगठन का उद्देश्य है कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को वह सम्मान मिले जिसके वे हकदार हैं। किन्नर अखाड़ा हिंदू धर्म में उनकी आध्यात्मिक भूमिका को पुनर्स्थापित करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करता है।photo Mamta Kulkarni becoming Mahamandaleshwar process Sangam bath own Pind  Daan and Pattabhishek संगम स्नान, अपना ही पिंडदान और पट्टाभिषेक, तस्वीरों  में देखिए ममता कुलकर्णी के ...

ममता नंद गिरि के रूप में नई पहचान

महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता को नया नाम ममता नंद गिरि दिया गया। यह नाम अब उनकी आध्यात्मिक यात्रा और नई पहचान का प्रतीक है। ममता का कहना है कि वे अब पूरी तरह से भगवान शिव और महाकाली की सेवा में समर्पित हैं।

ममता कुलकर्णी की आध्यात्मिक यात्रा

ममता कुलकर्णी ने अपने करियर के शिखर पर बॉलीवुड को अलविदा कह दिया था। वे हमेशा से आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित रही हैं। साध्वी का जीवन अपनाने के बाद, उन्होंने समाज से दूरी बना ली और एकांत में समय बिताया। अब महामंडलेश्वर के रूप में, वे किन्नर अखाड़े के उद्देश्य को आगे बढ़ाने और समाज में बदलाव लाने का प्रयास करेंगी।

महामंडलेश्वर बनने का महत्व

महामंडलेश्वर बनना न केवल एक आध्यात्मिक पद है, बल्कि यह सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारी भी है। ममता कुलकर्णी के इस नए पद पर आने से किन्नर अखाड़ा न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी मजबूत होगा।

ममता कुलकर्णी का बॉलीवुड से किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनने तक का सफर प्रेरणादायक है। उनका यह कदम न केवल उनकी आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाता है, बल्कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को समानता और सम्मान दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। महाकुंभ में महामंडलेश्वर के रूप में उनके पदस्थापन ने यह संदेश दिया है कि हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो, धर्म और समाज के लिए योगदान दे सकता है।


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