Chhattisgarh Heatwave Alert: रायपुर। नवतपा से पहले छत्तीसगढ़ में गर्मी ने रिकार्ड ब्रेक कर दिया है। सुबह सूरज चढ़ने के साथ सड़कों पर सन्नाटा हो जाता है। भीषण गर्मी के बीच कोरबा जिले में हीटस्ट्रोक से 200 चमगादड़ों की मौत हो गई। पाली विकासखंड के नौकोनिया तालाब किनारे सैकड़ों जीव पेड़ों से गिरकर मर गए।
Chhattisgarh Heatwave Alert: 18 जिलों में हीटवेव का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर समेत 18 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज गर्म हवाएं चलेगीं और तापमान 44-45 डिग्री तक पहुंच सकता है।
राजधानी रायपुर में रविवार को अधिकतम तापमान 46.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार 47.2 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है। रायपुर का आने वाले 7 दिनों में मौसम ऐसा ही बना रहेगा।

राजधानी रायपुर में दोपहर तक 44-45 डिग्री तापमान के चलते सड़के सूनी हो जाती हैं। संडे वीकेंड में शहर की अधिकांश दुकानें आज बंद रही। शहर में लॉकडाउन जैसे हालत बन गए हैं। शहर के प्रमुख बाजारों और चौक पर भी गिने चुने लोग पहुंच रहे हैं।

Chhattisgarh Heatwave Alert: ओपीडी में बढ़े हीट स्ट्रोक के मरीज
राजधानी के मेकाहारा अस्पताल के ओपीडी में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन, उल्टी-दस्त, लो बीपी, चक्कर और यूरिन इन्फेक्शन के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। बुजुर्गों में हार्ट और सांस संबंधी दिक्कतें भी बढ़ी हैं। ज्यादातर मरीज सिरदर्द, खुजली, मांसपेशियों में दर्द और चक्कर के शिकायत को लेकर पहुंच रहे हैं।
डाक्टरों के अनुसार तेज सिरदर्द, अत्यधिक प्यास, कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी और त्वचा का लाल पड़ना हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हैं। गंभीर स्थिति में मरीज बेहोश भी हो सकता है, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

सावधानी बरतकर बच सकते हैं हीट स्ट्रोक से
गर्मियों का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है, जिनमें सबसे खतरनाक है हीट स्ट्रोक। यह एक ऐसी स्थिति है जो तब होती है जब शरीर बहुत अधिक गर्मी के संपर्क में आता है और खुद को ठंडा नहीं रख पाता। समय पर इलाज ना होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
हीट स्ट्रोक क्या है
हीट स्ट्रोक (heat stroke in hindi), जिसे लू या सनस्ट्रोक (Sunstroke) भी कहा जाता है, एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति होती है जिसमें शरीर का तापमान 104°F (40°C) या उससे अधिक हो जाता है। यह तब होता है जब शरीर की तापमान नियंत्रित करने की प्रणाली विफल हो जाती है। अगर समय रहते इसका इलाज ना किया जाए तो यह मस्तिष्क, हृदय, किडनी और मांसपेशियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
हीट स्ट्रोक के प्रकार
हीट स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं – क्लासिक हीट स्ट्रोक और एक्सर्शनल हीट स्ट्रोक।
क्लासिक हीट स्ट्रोक: अधिकतर बुजुर्गों, बच्चों या लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहने वालों को होता है।
एक्सर्शनल हीट स्ट्रोक: उन लोगों को होता है जो गर्मी में अधिक शारीरिक मेहनत करते हैं, जैसे मजदूर, खिलाड़ी या सेना के जवान।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
हीट स्ट्रोक या लू के कई प्रमुख लक्षण होते हैं जिन्हें पहचान कर तुरंत इलाज करवाना ज़रूरी है। मरीज़ को तेज बुखार हो सकता है, शरीर गर्म और सूखा महसूस हो सकता है क्योंकि पसीना नहीं आता। सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी आना, भ्रम की स्थिति या बेहोशी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। त्वचा लाल और गर्म हो जाती है, और सांस तेज चल सकती है।
हीट थकावट और हीट स्ट्रोक के बीच अंतर
हीट थकावट हीट स्ट्रोक से कम गंभीर होती है, लेकिन अगर इसे नज़रअंदाज़ किया जाए तो यह हीट स्ट्रोक में बदल सकती है। हीट थकावट में मरीज़ को अधिक पसीना आता है, कमजोरी, चक्कर आना, मतली और सिर दर्द होता है, लेकिन शरीर का तापमान हीट स्ट्रोक की तरह बहुत अधिक नहीं होता और पसीना आना बंद नहीं होता।
कुछ लोग हीट स्ट्रोक के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जैसे कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, मोटे लोग और वे जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हैं। इसके अलावा, जो लोग गर्मी में अधिक काम करते हैं या ऐसे कपड़े पहनते हैं जो शरीर को ठंडा नहीं रहने देते, उन्हें भी इसका खतरा ज्यादा होता है।
हीट स्ट्रोक बचाव और लक्षण
हीट स्ट्रोक को पूरी तरह से रोका जा सकता है अगर हम सही समय पर सावधानियाँ बरतें। शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना सबसे महत्वपूर्ण है। तेज धूप में बाहर ना निकलें, अगर निकलना पड़े तो छाता, टोपी या हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें। खूब पानी पिएं और कैफीन या शराब से दूर रहें।
गर्मी के मौसम में कुछ आसान उपाय अपनाकर हीट स्ट्रोक से बचा जा सकता है। जैसे – सुबह या शाम को ही बाहर निकलें, दिन के सबसे गर्म समय में आराम करें। अधिक से अधिक पानी और फलों का रस पिएं। हल्का और पौष्टिक भोजन करें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें धूप में न जाने दें।
हीट स्ट्रोक के लिए प्राथमिक उपचार
अगर किसी को हीट स्ट्रोक हो जाए तो उसे तुरंत ठंडी जगह ले जाएं। उसके कपड़े ढीले कर दें और शरीर को ठंडे पानी से पोंछें या बर्फ की पट्टियां रखें। पंखा चलाएं या एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करें ताकि शरीर का तापमान जल्दी से कम किया जा सके। जब तक डॉक्टर न पहुंचे तब तक उसे ठंडा रखने की कोशिश करें और होश में आने पर पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स दें। अगर आपको या आपके किसी परिचित को इसके लक्षण दिखें तो इसे नज़रअंदाज़ ना करें।
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