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CM Bhagwant Mann: मानसा कोर्ट का आदेश, खुद पेश हों मुख्यमंत्री भगवंत मान, नहीं तो 'जमानत होगी रद्द, जानिए क्या है मामला

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CM Bhagwant Mann
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CM Bhagwant Mann: चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है। मानसा की एक स्थानीय कोर्ट ने सीएम भगवंत को एक मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं। पूर्व विधायक नजर सिंह मानशाहिया द्वारा सीएम भगवंत सिंह मान के खिलाफ दायर मामले में यह सुनवाई हुई। आरोपी ने चंडीगढ़ में एक जरुरी बैठक का हवाला देते हुए व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगी थी। मानसा के पूर्व विधायक नजर सिंह मानशाहिया ने मुख्यमंत्री पर आरोप लागया था कि, जुलाई 2019 में पार्टी छोड़ने के बाद संगरूर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री मान ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद उन्होंने अदालत का रूख किया।

जानकारी के मुताबिक, पिछली सुनवाई में मुख्यमंत्री की वर्चुअली मौजूदगी को अदालत ने खारिज कर दी थी और 28 अप्रैल को स्वयं उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। लेकिन सीएम मंगलवार को अदालत में पेश नहीं हो सके। अब अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगली तारीख पर भी यदि वे उपस्थित नहीं होते हैं तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।

2022 के बाद कोर्ट में नहीं हुए पेश

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी कि मान सिंह 20 अक्टूबर 2022 के बाद से कोर्ट में पेश नहीं हुए है, जिससे कार्यवाही बाधित हुई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि, उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का पिछला अनुरोध पहले ही खारिज किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 273 के तहत दायर एक आवेदन, जिसमें वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने की अनुमति मांगी गई है, को भी रिकॉर्ड पर ले लिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आवेदन का जवाब 1 मई, 2026 तक दाखिल किया जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, साल 2019 में आम आदमी पार्टी के पूर्व एमएलए नजर सिंह मनशाहिया ने भगवंत मान और अन्य के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। शिकायत के अनुसार, सीएम मान ने बयान दिया था कि मनशहिया ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बदले कांग्रेस से पैसे लिए थे। पूर्व एमएलए नजर सिंह मनशाहिया ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था, और कहा कि, पैसे लेकर पार्टी बदलने के आरोप निराधार है। यह सिर्फ उन्हें परेशान के छवि खराब करने के नियत से किया गया है।

निचली अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस भेजा था। कई आरोपियों ने राहत के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था। मार्च 2025 में कोर्ट ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज शिकायत को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उनका मानहानि का कोई इरादा या सबूत नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद कई आरोपियों के खिलाफ मामला रद्द हो गया था, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और शेष के खिलाफ मानहानि का मामला अभी भी चल रहा है। अब सब को एक मई का इंतजार है, क्योंकि कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।


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