President Alexander Stubb
President Alexander Stubb: मुंबई। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक भूमिका की जमकर सराहना की है। शनिवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जो वैश्विक विवादों के दौरान लगभग हर पक्ष से संवाद करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने भारत की विदेश नीति को व्यावहारिक और यथार्थवादी बताते हुए कहा कि यही संतुलित दृष्टिकोण भारत को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक खास स्थान दिलाता है।
President Alexander Stubb: पीएम मोदी से मुलाकात को बताया सम्मान
राष्ट्रपति स्टब ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उनके साथ करीब तीन घंटे बिताना उनके लिए सम्मान की बात रही। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच वैश्विक संघर्षों, चीन, अमेरिका, रूस और यूरोप के साथ संबंधों के अलावा भारत-फिनलैंड द्विपक्षीय रिश्तों पर भी व्यापक चर्चा हुई। स्टब ने कहा कि आज के समय में स्थानीय युद्ध तेजी से क्षेत्रीय संकट में बदल रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित होती है।
President Alexander Stubb: भारत की संतुलित विदेश नीति की सराहना
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संतुलित विदेश नीति उसे अलग पहचान देती है। भारत के रूस, यूक्रेन और अमेरिका जैसे देशों के साथ संबंध होने के कारण वह कई पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में सक्षम है। उनके अनुसार, भारत के गहरे सैन्य गठबंधन नहीं हैं, जिससे वह वैश्विक मंच पर अधिक खुलकर अपनी भूमिका निभा सकता है।
President Alexander Stubb: रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया पर टिप्पणी
रूस-यूक्रेन युद्ध पर टिप्पणी करते हुए स्टब ने कहा कि रूस का हमला रणनीतिक रूप से सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि रूस नाटो के विस्तार को रोकना चाहता था, लेकिन इसके उलट फिनलैंड और स्वीडन नाटो में शामिल हो गए। वहीं ईरान से जुड़े हालिया तनावों पर उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां जोखिम को और बढ़ा रही हैं।
President Alexander Stubb: भारत के भविष्य को लेकर जताई उम्मीद
अलेक्जेंडर स्टब ने भारत के भविष्य को लेकर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और समृद्ध इतिहास यह संकेत देते हैं कि आने वाला समय भारत के लिए बेहद अहम होगा। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हुए कहा कि वैश्विक संस्थाओं को आज की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना चाहिए।
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