सूरजपुर : बिश्रामपुर के ट्रांसपोर्टर ऋषिकेश पांडेय के साथ ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। दो कथित ड्राइवरों ने उनके साथ धोखाधड़ी करते हुए कोयला लोड किया, 30-30 हजार रुपये की डीजल पर्ची और 20 हजार रुपये नगद लेकर गंतव्य तक कोयला नहीं पहुंचाया। घटना के बाद से ड्राइवरों का कोई अता-पता नहीं है, जिससे ट्रांसपोर्टर और उनके साथियों में भय का माहौल है।
कैसे हुई ठगी?
बिश्रामपुर निवासी ऋषिकेश पांडेय, जो पेशे से ट्रांसपोर्टर हैं, को दो कथित ड्राइवरों ने कॉल कर कोयला लोडिंग का काम मांगा। ऋषिकेश ने हामी भर दी, जिसके बाद ड्राइवर रेहर खदान पहुंचे और वहां से कोयला लोड कर ओडिशा के राजगानपुर के लिए रवाना हुए।
इसके लिए दोनों ड्राइवरों ने 30-30 हजार रुपये की डीजल पर्ची और 10-10 हजार रुपये नगद लिए। अगले दिन जब ट्रांसपोर्टर ने उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने पत्थलगांव में ट्रक खराब होने की बात कही। लेकिन तीसरे दिन कॉल करने पर ड्राइवरों के फोन बंद मिले।
फर्जी ट्रक और ड्राइवर का पर्दाफाश
जब पूरे दिन ड्राइवरों से संपर्क नहीं हुआ, तो ऋषिकेश पांडेय ने अन्य माध्यमों से जानकारी जुटाई। उन्होंने पता किया कि जिन ट्रकों के नंबर उन्होंने दिए थे, वे ट्रक असल में किसी और के घर पर खड़े थे। वे ट्रक ओपन बॉडी थे, जिनका उपयोग मशीनरी सामान ढोने के लिए होता है, जबकि कोयला लोड करने के लिए डाला बॉडी ट्रक चाहिए।
ट्रांसपोर्टर ने दर्ज कराई शिकायत
इस घटना के बाद ऋषिकेश पांडेय ने अपने साथ हुई ठगी की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और कागजातों की छानबीन की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ट्रांसपोर्टरों में भय और अविश्वास
इस घटना ने न केवल ट्रांसपोर्टर को ठगा महसूस कराया है, बल्कि पूरे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है। ड्राइवरों और गाड़ियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या कहती है पुलिस?
पुलिस का कहना है कि यह ठगी संगठित अपराध हो सकता है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि इसके पीछे कौन लोग हैं और उनकी मंशा क्या थी।
