Pakistan
Pakistan: इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की गंभीर आर्थिक स्थिति पर खुलासा करते हुए कहा कि विदेशी कर्ज मांगने में उन्हें और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। निर्यातकों और कारोबारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि संकट के समय मित्र देशों से अरबों डॉलर की मदद मांगने के लिए चुपचाप कई दौरों पर गए, ताकि आईएमएफ से राहत पैकेज मिल सके और विदेशी मुद्रा की कमी पूरी हो सके।
Pakistan: शरीफ ने कहा, “जब फील्ड मार्शल असीम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे की भीख मांगने जाते हैं, तो हमें शर्म आती है। कर्ज लेना हमारे आत्मसम्मान पर भारी बोझ है। हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। कई बार हमें उनकी शर्तें माननी पड़ती हैं, चाहे वे उचित हों या नहीं।” उन्होंने माना कि कर्ज की प्रक्रिया आसान नहीं होती, इसमें दबाव और समझौते झेलने पड़ते हैं, जिससे राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचती है।
Pakistan: प्रधानमंत्री ने कठिन समय में मदद करने वाले मित्र देशों, खासकर चीन का आभार जताया, लेकिन जोर दिया कि कर्ज की एक कीमत चुकानी पड़ती है राष्ट्रीय गरिमा से समझौता। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है; जनवरी 2023 में भी उन्होंने बार-बार कर्ज मांगने की शर्मिंदगी जताई थी।
Pakistan: शरीफ का लक्ष्य स्पष्ट है पाकिस्तान को आईएमएफ कार्यक्रमों से बाहर निकालना, आत्मनिर्भर बनाना और कर्ज निर्भरता से मुक्ति पाना। हाल में आईएमएफ से 1.2 अरब डॉलर मिलने और विदेशी भंडार दोगुना होने के बावजूद, कर्ज और दोस्तों की मदद पर निर्भरता बनी हुई है।
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