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MP News: उज्जैन। तीर्थ नगरी उज्जैन में आज से दो दिवसीय द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस सम्मेलन का उद्देश्य आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति देना है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में भारत की सॉफ्ट पावर (सांस्कृतिक शक्ति) हमारी सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने आध्यात्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया भर से हर साल 1.8 करोड़ लोग हज करने जाते हैं और 1 करोड़ लोग उमरा करते हैं।
MP News: इसकी तुलना में भारत के सिर्फ उज्जैन में ही लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिससे यहां की आध्यात्मिक और आर्थिक शक्ति का पता चलता है। उन्होंने कहा कि तीर्थाटन और संत परंपरा ने भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का समय भारत का है और पूरी दुनिया हमारी तरफ देख रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बाबा महाकाल से लेकर प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने वीर दुर्गादास की छत्री के जीर्णोद्धार का भी भूमिपूजन किया, जिससे शहर के विकास को नई दिशा मिलेगी। आध्यात्मिक पर्यटन में भारत के शहर आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास ने बताया कि विश्व के शीर्ष 10 आध्यात्मिक शहरों में से चार भारत में हैं, जिनमें प्रयागराज, अयोध्या, तिरुपति और वाराणसी शामिल हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री की पहल से जल्द ही उज्जैन भी इस सूची में अपना स्थान बना पाएगा।
MP News: उन्होंने मुंबई और सूरत जैसे शहरों की तुलना करते हुए कहा कि हमें एक ऐसा शहर विकसित करना है जो पूरी तरह से आध्यात्मिक चेतना को समर्पित हो, और उज्जैन इस दिशा में पहला कदम उठा रहा है। आर्थिक विकास और भविष्य की योजनाएं पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि भारत को वैश्विक आध्यात्मिक पहचान दिलाने के लिए लगातार काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि भारत की जीडीपी का 2.5% हिस्सा केवल आध्यात्मिक पर्यटन से आता है, जिसे सबके सामूहिक प्रयास से 13% तक बढ़ाया जा सकता है। सम्मेलन में 12 ज्योतिर्लिंगों, मंदिर अर्थव्यवस्थाओं और उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसका मकसद सिंहस्थ-2028 के लिए कॉर्पोरेट समूहों और मंदिर ट्रस्टों को जोड़ना है। सम्मेलन में देश-विदेश से 300 से अधिक महानुभाव, विचारक और आध्यात्मिक गुरु शामिल हुए हैं। इस दौरान पीएचडीसीसीआई-केपीएमजी की रिपोर्ट ‘आस्था और प्रवाह: भारत के पवित्र स्थलों में जनसमूह का मार्गदर्शन’ का भी विमोचन किया गया।
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