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MP News: ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में एक सनसनीखेज घोटाला सामने आया है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए करीब 20 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, और जांच में यह राशि 100 करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। जीवित लोगों को दस्तावेजों में मृत दिखाकर और मृत लोगों को जीवित बताकर फर्जी बीमा क्लेम किए गए, जिसके तहत प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये की राशि निकाली गई।
MP News: ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा
फरवरी 2025 में ग्वालियर में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को एक शिकायत मिली थी, जिसमें संदिग्ध बीमा क्लेम की जानकारी दी गई थी। जांच शुरू होने पर पता चला कि इस घोटाले में मृत लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसी बनाई गई और फिर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए क्लेम हासिल किए गए। अब तक की जांच में 1,004 संदिग्ध क्लेम सामने आए हैं। EOW ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दी है।
MP News: जीवित लोगों को दस्तावेजों में मृत बताया
ग्वालियर के नदीम, इरशाद, नसीमा, सिमरन और कृष्णा शंखवार जैसे जीवित लोगों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र ग्वालियर नगर निगम से बनवाए गए और उनके नाम पर 2-2 लाख रुपये की बीमा राशि निकाली गई। पीड़ितों ने बताया कि लगभग दो साल पहले कुछ लोगों ने उन्हें मुद्रा लोन योजना के तहत लोन दिलाने का लालच दिया और उनके दस्तावेज लेकर फॉर्म भरवाए। लेकिन लोन तो नहीं मिला, उल्टे पुलिस उनके घर पहुंची और बताया कि उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर बीमा घोटाला किया गया है।
MP News: नगर निगम की प्रक्रिया पर सवाल
ग्वालियर नगर निगम के बाल भवन में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का कार्यालय है, जहां यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है। उपायुक्त प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि 2024 से आवेदक अपने दस्तावेज कहीं से भी अपलोड कर सकते हैं, जिसके बाद दस्तावेजों की जांच की जाती है और प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इस प्रक्रिया में हुई चूक ने घोटाले को आसान बना दिया।
MP News: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 18 से 55 वर्ष की आयु के लोगों के लिए है। यह एक नवीकरणीय पॉलिसी है, जिसमें पॉलिसीधारक को प्रतिवर्ष 436 रुपये का प्रीमियम देना होता है। पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। आवेदन के 45 दिन बाद प्रीमियम शुरू हो जाता है, और राशि साल में एक बार पॉलिसीधारक के खाते से कटती है या स्वयं भुगतान की जाती है।
MP News: पीड़ितों का दर्द
दस्तावेजों में मृत घोषित किए गए जीवित लोग अब अपनी व्यथा बयां कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे जीवित हैं, लेकिन इस घोटाले ने उनकी जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया है। EOW की जांच से इस घोटाले के और बड़े पैमाने पर होने की आशंका है, और प्रशासन इस मामले में कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।
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