उत्तराखंड के बागेश्वर में मकर संक्रांति का त्योहार बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है
उत्तराखंड के बागेश्वर में मकर संक्रांति का त्योहार बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है, जो जीवन और प्रकृति को नई दिशा प्रदान करता है।
सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का महत्व:
इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। इसका अर्थ है कि अब शीतलता समाप्त हो जाती है और गर्म ऊर्जा का संचार शुरू हो जाता है। सूर्य की यह स्थिति न केवल मौसम को प्रभावित करती है बल्कि हमारे जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाती है।
प्रकृति को मिलती है नई ऊर्जा:
मकर संक्रांति के दिन से शीतकाल में कमी आने लगती है और प्रकृति में नई ऊर्जा का प्रवाह होता है। पौष मास के दौरान, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी।
बागेश्वर का भव्य उत्तरायणी मेला:
उत्तराखंड के बागेश्वर में इस दिन को विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यहां मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तरायणी मेले का आयोजन होता है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है। इस मेले में सांस्कृतिक गतिविधियां, धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक आयोजन होते हैं, जो इस पर्व को और भी खास बना देते हैं।
धार्मिक और सामाजिक महत्व:
मकर संक्रांति का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक रूप से भी इसका गहरा प्रभाव है। इस दिन लोग तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान करते हैं। ये कर्म धार्मिक पुण्य प्राप्ति और समाज में समरसता का प्रतीक माने जाते हैं।
मकर संक्रांति का संदेश:
मकर संक्रांति न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह प्रकृति और मानव जीवन के बीच सामंजस्य और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि बदलते समय के साथ हम भी नई ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन की नई शुरुआत करें।
इस साल की मकर संक्रांति पर प्रकृति और समाज के इस अद्भुत समागम का हिस्सा बनें और इस पर्व का आनंद लें।
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