Mahakumbh 2025: शंभू पंचायती अटल अखाड़ा और पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने किया पहला अमृत स्नान...
Mahakumbh 2025 : मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर तिल, कंबल, लाल कपड़ा, लाल मिठाई, मूंगफली, चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, गुड़ और काली उड़द की दाल का दान करना शुभ माना जाता है। वहीं, आज सुबह 6:15 बजे से महाकुंभ का पहला अमृत स्नान शुरू हुआ, जो लगभग 9 घंटे तक चलेगा। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा ने सबसे पहले संगम में पवित्र स्नान किया।
स्वामी कैलाशानंद गिरि का संदेश
निरंजनी अखाड़े के स्वामी कैलाशानंद गिरि ने बताया कि उनका अखाड़ा राजसी अमृत स्नान की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह स्नान ऐसा दुर्लभ अवसर है, जिसे देवता भी पाने की इच्छा रखते हैं। आज लगभग 3-4 करोड़ लोग इस पवित्र स्नान में हिस्सा लेंगे। केंद्र और राज्य सरकार ने इस आयोजन को सफल बनाने में प्रशंसनीय कार्य किया है। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं, जो धर्मात्मा हैं और हमारी संस्कृति का सम्मान करते हैं।”
स्वामी जी ने यह भी साझा किया कि एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स उनके शिविर में हैं। उन्होंने कहा, “लॉरेन पहली बार इतनी भीड़-भाड़ वाली जगह पर आई हैं। वह बहुत सरल और विनम्र हैं। यह देखकर खुशी होती है कि हमारी परंपरा को देखने और समझने के लिए विदेशों से भी लोग आकर्षित हो रहे हैं।”
महानिर्वाणी अखाड़े का जुलूस और स्नान
महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े के साधुओं ने मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर महाकुंभ 2025 के पहले अमृत स्नान के रूप में अपना भव्य जुलूस निकाला। साधुओं ने त्रिवेणी संगम में गंगा, यमुना और रहस्यमयी सरस्वती के पवित्र संगम पर डुबकी लगाई। सनातन धर्म के 13 अखाड़ों के साधु और संत इस पावन स्नान में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और इष्ट देव के जयकारों के साथ यह दिव्य शोभायात्रा संगम की ओर प्रस्थान कर गई।
Mahakumbh 2025 :पवित्र स्नान और श्रद्धालुओं का उत्साह
महाकुंभ के इस पहले अमृत स्नान में देशभर से आए लाखों श्रद्धालु और साधु पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। संगम पर स्नान करने की परंपरा न केवल धर्म और आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है।
महाकुंभ का यह आयोजन न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सनातन धर्म और भारतीय परंपराओं की दिव्यता को अनुभव करने का अवसर है।

