CG Coal Transport Scam: High Court Dismisses 9 Appeals by Ranu Sahu and Family Members Against ED Attachment Orders
CG Coal Transport Scam: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और उनके परिजनों द्वारा दायर 9 अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अपराध से अर्जित संपत्ति का सीधा पता नहीं चलता, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समान मूल्य की अन्य वैध संपत्तियों को भी अटैच कर सकता है।
CG Coal Transport Scam: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। अपीलकर्ताओं में रानू साहू के अलावा उनके पिता अरुण कुमार साहू, माता लक्ष्मी साहू, भाई पीयूष और पंकज साहू, बहन पूनम साहू समेत अन्य परिजन शामिल थे, जिन्होंने अपनी संपत्तियों की कुर्की को चुनौती दी थी।
CG Coal Transport Scam: क्या था याचिकाकर्ताओं का तर्क
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ईडी द्वारा अटैच की गई कई संपत्तियां वर्ष 2020 से पहले खरीदी गई थीं, जबकि कथित घोटाला इसके बाद शुरू हुआ। इसलिए इन संपत्तियों को अपराध से जोड़ना गलत है। ईडी ने अदालत को बताया कि संबंधित सभी लोगों ने अपनी आय के वैध स्रोत स्पष्ट नहीं किए। एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली का एक संगठित सिंडिकेट संचालित था।
CG Coal Transport Scam: जांच एजेंसी का आरोप है कि कोरबा और रायगढ़ की कलेक्टर रहते हुए रानू साहू ने इस सिंडिकेट को संरक्षण दिया और बदले में लगभग 5.52 करोड़ रुपये की रिश्वत प्राप्त की। इस रकम को बाद में परिजनों के नाम पर बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया।
CG Coal Transport Scam: जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोप
जांच में सामने आया कि रानू साहू के परिजनों ने महासमुंद जिले में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी। खरोरा में उनकी माता के नाम पर कृषि भूमि, जबकि कलमीदादर में पिता और भाइयों के नाम पर कई खसरा नंबरों में हेक्टेयरों जमीन दर्ज पाई गई। अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी विभिन्न स्थानों पर संपत्तियां खरीदी गईं। ईडी के अनुसार, इन संपत्तियों की खरीद उस अवधि में हुई जब रानू साहू कोरबा में कलेक्टर के पद पर कार्यरत थीं।
CG Coal Transport Scam: बता दें कि 16 अक्टूबर 2022 को ईडी ने गरियाबंद जिले के पांडुका स्थित उनके मायके में छापेमारी की थी। इसके बाद बागबाहरा ब्लॉक के कलमीदादर स्थित फार्महाउस की भी जांच की गई, जहां पटवारी और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। जांच के बाद ईडी ने संबंधित संपत्तियों को अटैच कर लिया था, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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