8वीं की छात्रा गर्भवती : बच्ची के पेट में 7 महीने का गर्भ, लीपापोती में जुटा विभाग
सुकमा : 8वीं की छात्रा गर्भवती : जिले के एक आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली 8वीं की छात्रा के 7 महीने की गर्भवती होने का मामला सामने आया है। यह चौंकाने वाली खबर तब सामने आई जब छात्रा ने अचानक स्कूल आना बंद कर दिया। प्रबंधन ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया, जिसमें गर्भधारण की पुष्टि हुई। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया, लेकिन मामले को दबाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।
क्या है मामला?
सूत्रों के मुताबिक, छात्रा पिछले 15 दिनों से स्कूल नहीं आ रही थी। जब शिक्षकों ने उसकी सहेलियों से बात की तो पता चला कि वह गर्भवती है। खबर फैलने के बाद स्कूल की अधीक्षिका और प्रधानाध्यापिका ने मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दी। इसके बाद चाइल्ड प्रोटेक्शन कमीशन की टीम ने स्कूल का दौरा किया और जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद थाने में FIR दर्ज कराई गई।
प्रबंधन की लीपापोती
मामले के तूल पकड़ने के बाद विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालनी शुरू कर दी। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने कहा कि, “यह घटना बच्चों के छुट्टी पर घर जाने के दौरान हुई होगी। मेडिकल जांच की जिम्मेदारी अधीक्षिका की है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।”
शिक्षा विभाग के अधिकारी भी अनजान
सुकमा के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सुखराम देवांगन ने बयान दिया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं दी गई। वहीं, जिला मिशन समन्वयक उमा शंकर तिवारी ने भी पल्ला झाड़ते हुए कहा कि, “मुख्यालय से बाहर होने के कारण मुझे जानकारी नहीं है। चाइल्ड प्रोटेक्शन कमीशन को ही इस बारे में पता होगा।”
बड़ा सवाल: कौन है जिम्मेदार?
पूरे मामले ने शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफलता दिखाई है।
प्रश्नों के घेरे में व्यवस्था
- अगर छात्रा गर्भवती थी, तो विद्यालय प्रबंधन को इसकी पहले से जानकारी क्यों नहीं थी?
- बच्चों के मेडिकल परीक्षण में यह बात क्यों नहीं सामने आई?
- जिन अधिकारियों पर बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा है, क्या वे अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं?
