चुनाव प्रक्रिया में देरी
पंजीकरण और चुनाव: आवासीय सोसायतियों का पंजीकरण सहकारी संस्थाओं में होता है, जिसके बाद चुनाव आयोजित करने की जिम्मेदारी विभाग की होती है।
लंबित फाइलें: कई फाइलें वर्षों से पेंडिंग हैं, जिससे संचालन में बाधा आ रही है।
संभावित विवाद
चुनाव न कराने का परिणाम: यदि चुनाव समय पर नहीं होते हैं, तो विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विभाग के अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समय सीमा के भीतर चुनाव कराए जाएं।
निवासियों के अधिकारों का हनन: चुनावों में देरी से निवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग समय पर चुनाव करवा दे, तो लंबित फाइलों का निपटारा संभव है। हालांकि, अधिकारियों की अनिच्छा और धीमी प्रक्रिया इस मुद्दे को गंभीर बना रही है। अब देखना होगा कि सहकारिता मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इस स्थिति पर कब संज्ञान लेते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं।