European NATO: वॉशिंगटन/ब्रसेल्स। डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। नाटो के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े मुद्दों को लेकर।
European NATO: ट्रंप प्रशासन यूक्रेन को पूर्ण अमेरिकी समर्थन देने के पक्ष में नहीं रहा है, जिससे यूरोपीय देशों में असहजता बढ़ी है। हाल ही में ईरान के साथ बढ़े तनाव के बाद यह दूरी और गहरी हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
European NATO: द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय अधिकारी एक वैकल्पिक सुरक्षा ढांचे पर काम कर रहे हैं, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘यूरोपियन NATO’ कहा जा रहा है। इस प्रस्ताव के तहत नाटो के कमांड और कंट्रोल ढांचे में यूरोपीय देशों की भूमिका बढ़ाने और अमेरिकी सैन्य संसाधनों को किसी रूप में बनाए रखने की योजना पर चर्चा हो रही है।
European NATO: सूत्रों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य नाटो को बदलना नहीं, बल्कि रूस के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा बनाए रखना, ऑपरेशनल निरंतरता सुनिश्चित करना और संभावित अमेरिकी वापसी की स्थिति में परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखना है।
European NATO: इस योजना को जर्मनी का समर्थन मिला है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अमेरिका पर निर्भरता को लेकर चिंता जताई है। वहीं, ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्हें ‘कमजोर’ बताया और चेतावनी दी कि यदि वे अमेरिका की प्राथमिकताओं, खासकर ईरान मुद्दे पर, साथ नहीं देते तो समर्थन वापस लिया जा सकता है।
European NATO: यूरोप के अन्य नेताओं ने भी इस बदलते परिदृश्य को स्वीकार किया है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि सुरक्षा का बोझ धीरे-धीरे अमेरिका से यूरोप की ओर स्थानांतरित हो रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को ‘नियंत्रित और चरणबद्ध’ तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
European NATO: जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी कहा कि नाटो अभी भी यूरोप और अमेरिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अब यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा की जिम्मेदारी अधिक सक्रिय रूप से उठानी होगी। ऐसे में यदि अमेरिका नाटो से दूरी बनाता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा ढांचे में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और यूरोप को अपनी सामरिक नीति में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं।
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