Land Record
Land Record : नई दिल्ली। अब देश के 19 राज्यों के नागरिक अपने जमीन के रिकॉर्ड (लैंड रिकॉर्ड) डिजिटल माध्यम से घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे। यह दस्तावेज कानूनी रूप से वैध होंगे और बैंक भी इन रिकॉर्ड को ऑनलाइन ही जांच सकेंगे, जिससे लोन मिलने की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी। कुल मिलाकर 406 जिलों में बैंक अब जमीन गिरवी रखने (मॉर्गेज) की जानकारी डिजिटल रूप से प्राप्त कर सकते हैं, जिससे जमीन से जुड़े वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
Land Record : केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग ने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देश के 97 प्रतिशत से अधिक गांवों में जमीन से जुड़े अधिकार और रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं। करीब 97 प्रतिशत जमीन के नक्शे भी डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं और लगभग 85 प्रतिशत गांवों में लिखित रिकॉर्ड को नक्शों से जोड़ दिया गया है।
Land Record : शहरी क्षेत्रों में जमीन की व्यवस्था को सुधारने के लिए ‘राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित शहरी आवास भूमि सर्वेक्षण’ (एनएकेएसएचए) योजना लागू की गई है। इसके तहत 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में काम किया जा रहा है। इनमें से 116 यूएलबी में हवाई सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जिसमें 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग की गई है। इसके अलावा, 72 शहरों में जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण शुरू हो चुका है और 21 शहरों में यह कार्य पूर्ण हो गया है।
Land Record : सरकार ने जमीन के लिए विशेष पहचान संख्या ‘यूएलपीआईएन’ भी शुरू की है। यह 14 अंकों का नंबर जमीन का आधार कार्ड माना जा रहा है। नवंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से अधिक लैंड पार्सल को यह नंबर प्रदान किया जा चुका है।
Land Record : इसके अलावा, राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) शुरू की गई है, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री और पंजीकरण प्रक्रिया आसान और तेज हो गई है। यह सिस्टम पंजाब, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों में लागू हो चुका है। लगभग 88 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (एसआरओ) अब राजस्व कार्यालयों से डिजिटल रूप से जुड़ चुके हैं, जिससे रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद जमीन का रिकॉर्ड अपडेट हो जाता है।

