CG News : भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान
रायपुर/कबीरधाम: नववर्ष 2026 की शुभ शुरुआत छत्तीसगढ़ में एक ऐतिहासिक पहल के साथ हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले के भोरमदेव धाम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य से होना राज्य के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। महादेव शिव की आराधना, हरे-भरे वनांचल का प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं भोरमदेव धाम को अद्वितीय बनाती हैं। यह स्थल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रमुख केंद्र है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से इस कॉरिडोर का विकास किया जाएगा, जिसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रदेश के पर्यटन विकास के लिए मील का पत्थर बताते हुए इसके लिए समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित और विकसित करने के प्रयासों की सराहना की और इस परियोजना के लिए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भोरमदेव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में यह परियोजना निर्णायक भूमिका निभाएगी।
भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह वास्तुकला लगभग एक हजार वर्षों की साधना, शिल्पकला और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रमाण है। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियां भारतीय स्थापत्य कला की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं।
उन्होंने बताया कि सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां आदिवासी परंपराओं और शैव दर्शन का अनोखा संगम देखने को मिलता है। मड़वा महल और छेरकी महल जैसे ऐतिहासिक स्थल भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर इसे रोजगार और निवेश से जोड़ रही है। नई पर्यटन नीति और होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। सड़कों, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर का भूमिपूजन न केवल कबीरधाम जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आने वाले हजार वर्षों तक भोरमदेव मंदिर की विरासत को संरक्षित रखने का कार्य करेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांस्कृतिक दृष्टि का सशक्त उदाहरण बनेगी।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे और स्वदेश दर्शन योजना में शामिल होने के बाद आज इसका भूमिपूजन होना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव के साथ-साथ पंचमुखी श्री बूढ़ा महादेव मंदिर के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

