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UP News : लखनऊ : गोरखपुर में अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए स्वतः रोजगार योजना के तहत दी गई 1.12 करोड़ रुपये की ऋण अनुदान राशि के गबन मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), लखनऊ ने बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने दो बर्खास्त डाककर्मियों, शैलेंद्र कुमार और परशुराम, को क्रमशः पटना और गोरखपुर से गिरफ्तार किया। इस मामले की जांच अभी भी जारी है।
UP News : उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड, गोरखपुर द्वारा विशेष घटक योजना (स्पेशल कॉम्पोनेन्ट प्लॉन) के तहत वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2015-16 तक स्वतः रोजगार योजना के लिए लाभार्थियों को 85 चेकों के माध्यम से 1,12,40,000 रुपये की राशि जारी की गई थी। जांच में सामने आया कि फर्जी लाभार्थियों के कूटरचित आवेदन पत्र तैयार किए गए थे। इनमें से केवल दो चेकों के जरिए 20,000 रुपये ही सही लाभार्थियों तक पहुंचे। शेष 83 चेकों की राशि, यानी 1,12,20,000 रुपये, बेतियाहाता और सिविल लाइंस डाकघरों से कैश कराकर आरोपियों ने आपस में बांट लिया।
UP News : इस मामले में 21 जून 2018 को कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जांच 26 दिसंबर 2018 को ईओडब्ल्यू को सौंपी गई। जांच में सात आरोपियों को दोषी पाया गया, जिनमें से तीन के खिलाफ आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है और तीन की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। मंगलवार को ‘अभियान शिकंजा’ के तहत ईओडब्ल्यू ने शैलेंद्र कुमार (पटना) और परशुराम (गोरखपुर) को गिरफ्तार किया।
UP News : जांच में पता चला कि शैलेंद्र कुमार, जो कूड़ाघाट डाकघर, गोरखपुर में कर्मचारी था, ने अपने नाम से फर्जी खाता खोलकर अन्य खातों से राशि ट्रांसफर कर लाखों रुपये का गबन किया। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में गहन जांच शुरू की है और बाकी बची राशि के दुरुपयोग के तरीकों का पता लगाया जा रहा है।
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