उत्तर प्रदेश की शहजादी को दुबई में फांसी की सजा...आखिर क्यों और कैसे...पढ़े पूरी खबर
दुबई : दुबई में एक उत्तर प्रदेश की महिला को बच्चे की मौत के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है। यह मामला यूएई के वदीमा कानून से जुड़ा हुआ है, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद कड़ा है। इस घटना के बाद वदीमा कानून को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह कानून बच्चों की सुरक्षा में कैसे काम करता है और इसके तहत कौन सी सजा तय की जाती है।
क्या हैं वदीमा कानून
वदीमा कानून यूएई में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है। यह कानून 2016 में लागू किया गया था, जिसका नाम वदीमा नामक एक बच्ची के नाम पर रखा गया था, जिसे उसके माता-पिता ने अत्याचार कर मार डाला था। इस कानून का उद्देश्य बच्चों के साथ किसी भी तरह की उपेक्षा, शोषण या हिंसा को रोकना है और दोषियों को सख्त सजा देना है।
उद्देश्य?
वदीमा कानून बच्चों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत किसी भी बच्चे को शोषण, अत्याचार या लापरवाही का शिकार बनाना एक बड़ा अपराध माना जाता है। यदि किसी बच्चे की सुरक्षा में कोई कमी पाई जाती है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।इसके अलावा, बच्चों की चिकित्सा देखभाल, शिक्षा और मानसिक भलाइ को सुनिश्चित करने के लिए भी यह कानून कार्य करता है।
UP की शहजादी पर आरोप
उत्तर प्रदेश की महिला दुबई में एक बच्चे की देखभाल कर रही थी, लेकिन उसके खिलाफ यह आरोप लगा कि उसने बच्चे की देखभाल में लापरवाही बरती, जिससे बच्चे की मौत हो गई। इस आरोप के तहत उसे वदीमा कानून के तहत फांसी की सजा सुनाई गई है। यूएई के इस कानून के मुताबिक, यदि किसी बच्चे की उपेक्षा या शोषण की वजह से उसकी मौत हो जाती है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है, जो मौत की सजा तक पहुंच सकता है।
वदीमा कानून के तहत क्या हैं सजा
यूएई में यह कानून बच्चों के शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है। इसमें बाल श्रम, मानसिक प्रताड़ना और किसी भी प्रकार के शारीरिक नुकसान का दोषी पाए जाने पर मौत तक की सजा दी जा सकती है। यह कानून पारिवारिक और कानूनी रिश्तों में बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है और बच्चों के खिलाफ किसी भी तरह के अपराध की सजा को बेहद सख्त बनाता है।
क्या होगा शहजादी के मामले में?
अब तक उत्तर प्रदेश की शहजादी को मिली सजा पर कई सवाल उठ रहे हैं। यूएई के कानून में इस तरह की घटनाओं के लिए कानूनी राहत की कोई उम्मीद नहीं होती, लेकिन पीड़ित पक्ष की माफी या राजनीतिक दबाव के कारण कभी-कभी सजा में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में यूएई के कानून के तहत सजा देने का निर्णय किया गया है, और भविष्य में इसके खिलाफ कोई कानूनी बदलाव या अपील की संभावना है।
