Year Ender 2025: इसरो ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास, इन उपलब्धियों से दुनिया में बजा भारत का डंका
Year Ender 2025: नई दिल्ली। साल 2025 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे सफल वर्ष साबित हुआ। इसरो ने इस साल 200 सफल मिशनों का आंकड़ा पार किया और स्पेस डॉकिंग, भारी उपग्रह लॉन्चिंग तथा स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक में नई उपलब्धियां दर्ज कीं। जनवरी 2025 में ‘स्पैडेक्स’ मिशन के माध्यम से भारत ने दो उपग्रहों को अंतरिक्ष में जोड़कर तकनीकी परिपक्वता दिखाई और दुनिया में चौथे देश के रूप में इस क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाई।
Year Ender 2025: साल के अंतिम हफ्तों में, 24 दिसंबर को इसरो ने एलवीएम3 रॉकेट ‘बाहुबली’ के जरिए 6100 किलो वजनी अमेरिकी संचार उपग्रह ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर भारत की कमर्शियल लॉन्चिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नया मुकाम दिया। इसके अलावा, इसरो ने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (SE2000) का सफल “हॉट टेस्ट” कर भविष्य के शक्तिशाली रॉकेटों के लिए रास्ता तैयार किया।
Year Ender 2025: मानव अंतरिक्ष क्षेत्र में भी भारत ने बड़ा मुकाम हासिल किया। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने ‘एक्सिओम-4’ मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताकर भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन के सपनों को नई ऊँचाई दी। वह राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने।
Year Ender 2025: सौर अनुसंधान और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में भी इसरो ने अपनी ताकत दिखाई। भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 ने सूर्य से जुड़े लगभग 15 टेराबाइट डेटा वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा किए। इसके अलावा, इसरो और नासा का संयुक्त मिशन ‘निसार’ दुनिया का पहला दोहरी आवृत्ति वाला रडार इमेजिंग सैटेलाइट साबित हुआ, जो भूकंप, सुनामी और जलवायु परिवर्तन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की सटीक निगरानी करेगा।
Year Ender 2025: साल 2025 की इन उपलब्धियों ने न केवल इसरो को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक मान्यता दिलाई, बल्कि भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया।
