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UP News : लखनऊ। योगी सरकार इस साल अयोध्या में ‘दीपोत्सव 2025’ को और भी भव्य और यादगार बनाने की तैयारियों में जुटी है। 19 अक्टूबर 2025 को होने वाले इस आयोजन में रामनगरी लाखों दीयों की रोशनी से जगमगाएगी, और आसमान में 1,000 से अधिक रंग-बिरंगे ड्रोन भक्ति, अध्यात्म और आधुनिकता का अनूठा समन्वय प्रस्तुत करेंगे। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस बार का दीपोत्सव विश्व स्तर पर भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक बनेगा।
UP News : ड्रोन शो की भव्यता
पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित 15 मिनट के एरियल ड्रोन शो में ‘मेड इन इंडिया’ ड्रोन प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान की धनुर्धारी मुद्राओं को जीवंत करेंगे। लेजर लाइट्स, वॉयस ओवर और संगीतमय नैरेशन के साथ यह शो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा। पिछले साल 2024 में 500 ड्रोन के साथ हुए शो को दर्शकों ने खूब सराहा था, और इस बार इसे दोगुना भव्य बनाया जा रहा है। ड्रोन शो का रिहर्सल राम की पैड़ी पर आयोजित होगा ताकि इसका सही क्रम सुनिश्चित किया जा सके।
UP News : दीपोत्सव का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव का आयोजन भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की पौराणिक स्मृति को जीवंत करने के लिए किया जाता है। इस अवसर पर सरयू नदी के घाटों पर लाखों दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे, और पूरे नगर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। शोभायात्रा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक आयोजन इस उत्सव को और भी विशेष बनाएंगे। यह आयोजन न केवल अयोध्या की आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाएगा, बल्कि विश्व बंधुत्व, सबका साथ और सबका विश्वास का संदेश भी देगा।
UP News : परंपरा और आधुनिकता का संगम
मंत्री ने कहा कि प्रभु रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद यह दूसरा दीपोत्सव है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और भी भव्य बनाया जा रहा है। ड्रोन शो के जरिए परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। यह आयोजन अयोध्या को वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करेगा।
UP News : योगी सरकार की प्रतिबद्धता
पर्यटन विभाग दीपोत्सव को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सीएम योगी के नेतृत्व में अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। दीपोत्सव 2025 न केवल धार्मिक उत्सव होगा, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी प्रगति का प्रतीक भी बनेगा।
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