Ujjain Mahakal
Ujjain Mahakal: उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में देशभर के त्योहारों को सबसे पहले मनाने की परंपरा के अनुसार, 77वें गणतंत्र दिवस की शुरुआत भी यहीं से हुई। सुबह ठीक 4 बजे भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों में आकर्षक शृंगार किया गया।
Ujjain Mahakal: परंपरा अनुसार सबसे पहले मंदिर के पट खोले गए। बाबा को गर्म जल से स्नान कराया गया, फिर सुगंधित द्रव्य, इत्र, फलों के रस और पंचामृत से अभिषेक हुआ। विजया (भांग) से विशेष शृंगार के बाद ललाट पर चंदन से भगवा व सफेद तथा भांग से हरा रंग लगाकर तिरंगे का तिलक किया गया। तीन रंगों की माला भी पहनाई गई। मंदिर का शिखर तीन अलग-अलग रंगों की रोशनी से जगमगाया गया।

Ujjain Mahakal: इसके बाद भस्मारती की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले श्वेत वस्त्र ओढ़ाया गया, फिर महानिर्वाणी अखाड़े के संत ने भस्म चढ़ाई। इस दौरान महिलाएं परंपरानुसार घूंघट कर लेती हैं। भस्म शृंगार के बाद बाबा को चांदी के मुंडमाल, विशाल शेषनाग, रुद्राक्ष माला और चांदी का मुकुट पहनाकर राजाधिराज स्वरूप प्रदान किया गया।
Ujjain Mahakal: डमरू, शंख, नगाड़े और घंटियों की गूंज के बीच मंत्रोच्चार के साथ भस्म आरती हुई। पुजारियों ने देश की समृद्धि और विकास की कामना की। देश-विदेश से आए हजारों भक्तों ने इस दुर्लभ दृश्य का दर्शन किया।
