UGC Regulation 2026
UGC Regulation 2026: नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस-2026’ पर अंतरिम रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने प्रथम दृष्टया रेगुलेशन की भाषा को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग हो सकता है और इसे संशोधित करने की जरूरत है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है तथा मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च निर्धारित की है। तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
UGC Regulation 2026: याचिकाकर्ता अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी, विनीत जिंदल, राहुल दीवान और विष्णु शंकर जैन ने रेगुलेशन को सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 19 तथा यूजीसी एक्ट-1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ये नियम समानता के नाम पर एक विशेष वर्ग को तरजीह देते हैं, जिससे सामान्य श्रेणी के छात्रों के अवसर सीमित हो सकते हैं और परिसरों में जातिगत विभाजन बढ़ेगा।
UGC Regulation 2026: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए। क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं? जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।” पीठ ने अलग-अलग हॉस्टल बनाने या जाति के आधार पर छात्रों को बांटने को खतरनाक करार दिया। सीजेआई ने अमेरिका के पृथक स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में शिक्षण संस्थानों को एकता का प्रतीक बनना चाहिए।
UGC Regulation 2026: पीठ ने रैगिंग को संस्थानों का माहौल जहरीला बनाने वाला बताया और आरक्षित वर्गों में भी ‘क्रीमी लेयर’ की चर्चा की। न्यायमूर्ति बागची ने पूछा कि प्रगतिशील कानून में प्रतिगामी रुख क्यों? सॉलिसिटर जनरल को निर्देश देते हुए सीजेआई ने कहा कि प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित कर रेगुलेशन की भाषा को स्पष्ट और दुरुपयोग-मुक्त बनाया जाए। देशभर में इन नियमों को लेकर चल रहा विवाद अब कोर्ट की गहन जांच के दायरे में आ गया है।
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