दिल्ली : Rekha Gupta : दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लंबे समय बाद सत्ता में वापसी की है, लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला फैसला मुख्यमंत्री पद को लेकर रहा। पार्टी ने पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता को दिल्ली का मुख्यमंत्री बना दिया। यह फैसला कई लोगों के लिए अप्रत्याशित था, लेकिन भाजपा की रणनीति के तहत बिल्कुल सटीक बैठता है। सवाल यह उठता है कि रेखा गुप्ता कौन हैं और उन्हें दिल्ली की सबसे बड़ी कुर्सी क्यों सौंपी गई?
Rekha Gupta : छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
रेखा गुप्ता का राजनीतिक सफर अचानक नहीं उभरा, बल्कि उन्होंने इसे सालों की मेहनत से गढ़ा है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की अध्यक्ष बनीं। उस दौर में उनका नेतृत्व करने का तरीका और संगठन की समझ साफ दिखाई देने लगी थी।
MCD से मिली ताकत
छात्र राजनीति के बाद उन्होंने भाजपा में अपनी सक्रियता बढ़ाई और दिल्ली नगर निगम (MCD) का चुनाव लड़ा। पार्षद बनने के बाद उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया और उत्तरी दिल्ली की मेयर बनीं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा जीता।
पहली बार विधायक और सीधे सीएम
2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने शालीमार बाग सीट से चुनाव लड़ा और आम आदमी पार्टी (AAP) की मजबूत प्रत्याशी को हराया। यह जीत उनके बढ़ते कद को दिखाती है। लेकिन इससे भी बड़ा सरप्राइज तब आया जब भाजपा ने उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बना दिया। आमतौर पर भाजपा अनुभवी नेताओं को यह जिम्मेदारी देती है, लेकिन इस बार पार्टी ने नई ऊर्जा और साफ छवि को प्राथमिकता दी।
भाजपा ने क्यों लगाया दांव?
- नई और साफ छवि: रेखा गुप्ता पर किसी भी तरह का भ्रष्टाचार या विवाद नहीं जुड़ा है। भाजपा दिल्ली में एक नई शुरुआत करना चाहती थी और इसके लिए वह किसी पुराने नेता के बजाय एक नए चेहरे को आगे लाना चाहती थी।
- महिला नेतृत्व को बढ़ावा: भाजपा देशभर में महिला नेतृत्व को बढ़ाने पर जोर दे रही है। रेखा गुप्ता को सीएम बनाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
- संगठन में पकड़: रेखा गुप्ता ने छात्र राजनीति से लेकर मेयर तक, हर भूमिका में संगठन को मजबूत किया है। उनकी यह क्षमता उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त बनाती है।
- संघ से नजदीकी: उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी गहरा संबंध है, जो भाजपा के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर है।
चुनौतियां
दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने के बाद रेखा गुप्ता के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी—
- दिल्ली का प्रदूषण और ट्रैफिक नियंत्रण
- यमुना की सफाई और जल संकट
- महिलाओं की सुरक्षा
- बिजली और पानी की आपूर्ति में सुधार
- स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना
दिल्ली की सत्ता में लंबे समय तक आम आदमी पार्टी (AAP) का दबदबा रहा है, लेकिन भाजपा ने इस बार एक नया दांव खेला है। रेखा गुप्ता के पास बड़ा अवसर है कि वह दिल्ली की जनता का विश्वास जीतें और पार्टी को स्थायी रूप से मजबूत करें।
अब देखना यह होगा कि पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता अपनी राजनीतिक सूझबूझ और प्रशासनिक कौशल से दिल्ली को कितनी नई ऊंचाइयों तक ले जा पाती हैं।