मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू, बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी...
नई दिल्ली: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के 9 फरवरी को इस्तीफा देने के बाद लिया गया। बीरेन सिंह ने यह इस्तीफा राज्य में चल रही जातीय हिंसा के लगभग दो साल बाद दिया, जिसके चलते उनकी सरकार की आलोचना हो रही थी।
इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन की संभावना
बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद से यह चर्चा थी कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है। संविधान के अनुसार, किसी भी राज्य की विधानसभा की दो बैठकों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। मणिपुर विधानसभा के मामले में यह समय सीमा 9 फरवरी को समाप्त हो गई थी, और किसी भी पार्टी या गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया।
विधानसभा सत्र का स्थगन
मणिपुर विधानसभा का सत्र 10 फरवरी से शुरू होना था, लेकिन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद इसे स्थगित कर दिया गया। यह उस समय हुआ जब कांग्रेस विधानसभा सत्र में बीरेन सिंह के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन लाने की तैयारी कर रही थी। अब, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद इस राजनीतिक उठापटक पर विराम लग गया है।
राष्ट्रपति शासन का प्रभाव
राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य की शासन व्यवस्था में कई बदलाव होते हैं। राज्य का प्रशासन राष्ट्रपति के नियंत्रण में आ जाता है, और राष्ट्रपति अपने प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल को प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। राज्यपाल केंद्र के निर्देशों के आधार पर शासन करता है।
कानूनों पर प्रभाव
आमतौर पर राज्यों की विधानसभा कानून बनाती हैं, लेकिन राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य के कानून संसद बनाती है। यदि संसद का सत्र नहीं चल रहा हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है। राष्ट्रपति शासन अधिकतम 6 महीने के लिए लागू किया जा सकता है, लेकिन इसे 3 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है, जिसके लिए संसद की अनुमति आवश्यक होती है।
राष्ट्रपति शासन लागू होने की परिस्थितियाँ
राष्ट्रपति शासन तब लागू किया जाता है जब राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों का पालन करने में असमर्थ होती है। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने, सरकार के अल्पमत में आने, भ्रष्टाचार, विद्रोह, आपदा या अन्य कारणों से भी राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
इस प्रकार, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने से राज्य की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे और प्रशासन केंद्र के नियंत्रण में रहेगा।
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