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New Year 2025 Special : प्रकृति की खूबसूरती लोगों को करती हैं आकर्षित, मां सियादेवी के धाम में भक्तों की लगने लगी कतार

New Year 2025 Special : प्रकृति की खूबसूरती लोगों को करती हैं आकर्षित, मां सियादेवी के धाम में भक्तों की लगने लगी कतार
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बालोद : New Year 2025 Special : बालोद जिले में जंगलों के बीच बसा नरगांव....जहां प्रकृति और आस्था का अनोखा तालमेल है....एक तरफ जहां घनघोर जंगल के बीच माता सती सियादेवी के रूप में विराजमान है तो वही दूसरी तरफ प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को खूब भा रही है....नववर्ष नजदीक है ऐसे में लोग अपने नए साल की शुरुआत आध्यात्म और आस्था से करने के लिए मां सियादेवी के धाम पर माथा टेकते के लिए पहुंच रहे हैं।

सियादेवी मंदिर बालोद जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर नारागांव में स्थित है....जहां बरसात के मौसम में झर झर बहते झरने सियादेवी की खूबसूरती में और चार चांद लगा देते हैं....झरने के पास ही संकरी गुफा भी लोगों को अपनी ओर खींचती है...=साल के दोनो नवरात्र के पर्व में जंगल के बीच विशाल मेले का आयोजन होता है....और मंदिर समिति की ओर से नौ दिनों तक एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.

इसके अलावा बरसात के दिन में लोगों की अच्छी भीड़ आस्था के केंद्र सियादेवी में होती है....जिसकी वजह है कि बारिश के दिनों में सियादेवी स्थित ऊंचे ऊंचे पहाड़ों से बरसात का पानी जंगल के रास्ते झरने के रूप में गिरता है.

वैसे तो सियादेवी का इतिहास काफी पुराना है....जहा वनवास काल के दौरान भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए माता पार्वती सीता के रूप में उनके पास पहुंची थी लेकिन परीक्षा लेने के दौरान भगवान राम ने उन्हें पहचान लिया और उसी समय माता पार्वती वहां सियादेवी के रूप में विराजमान हो गई तब से लेकर अब तक उनकी पूजा वहां की जाती है।

मंदिर समिति की माने तो छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य के लोग सियादेवी माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं....लेकिन इतने बड़े आस्था के केंद्र में दूर दराज से आए दर्शनार्थियों के लिए रुकने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है....वहीं सियादेवी तक जाने के लिए 4 किलोमीटर का रास्ता काफी खराब है....जिसके चलते आस्था के दरवाजे पर पहुंचने के लिए भक्तों को काफी परेशानी होती है।

मंदिर समिति की ओर से प्रशासन से चैक डैम बनाने की मांग भी की है....ताकि बरसात के दिनों में पानी को चैक डैम में इकट्ठा किया जा सके जिससे सालभर झरने में पानी बहता रहे....जिससे पूरे साल भर श्रद्धालुओं का सैलाब लगा रहे....बरसात के दिनों में झरने को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते है और अन्य दिनों में झरना बहना बंद हो जाता है इसलिए भक्तों की संख्या कम हो जाती है।


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