Magh Mela 2026 : सुनाते हैं गाना, बांटते हैं सेंट…प्रयागराज माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बने ‘सेंट बाबा’, दरबार में लगती है भक्तों की भीड़
Magh Mela 2026 : प्रयागराज। संगम तट पर आयोजित आध्यात्मिक माघ मेले में इन दिनों आस्था, साधना और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां संगम में स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच मेले में पहुंचे कई अनोखे साधु-संत अपनी अलग पहचान बना रहे हैं, जिनमें नागा संन्यासी ‘सेंट बाबा’ श्रद्धालुओं के बीच खास चर्चा का विषय बने हुए हैं।
Magh Mela 2026 : माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर दो में अपने शिविर में विराजमान सेंट बाबा पूरे शरीर पर भस्म लगाए, आंखों पर काला चश्मा पहने और धूनी रमाते हुए दिनभर साधना में लीन रहते हैं। बाबा के दरबार में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बाबा भक्तों को आशीर्वाद देने का भी एक अलग ही तरीका अपनाते हैं वे प्रसाद के रूप में इत्र यानी ‘सेंट’ छिड़कते हैं।
Magh Mela 2026 : श्मशान से लाया गया ‘सेंट’ बनता है प्रसाद
सेंट बाबा बताते हैं कि वे यह सेंट मसान यानी श्मशान घाट से लाते हैं और श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप देते हैं। इसी अनोखी पहचान के चलते लोग उन्हें ‘सेंट बाबा’ के नाम से जानने लगे। बाबा का कहना है कि जहां भी वे जाते हैं, सेंट से भरा पिटारा हमेशा उनके साथ रहता है।
Magh Mela 2026 : 13 साल की उम्र में त्याग दिया था घर
सेंट बाबा का असली नाम बाबा बालक दास उर्फ नारायण भूमि है। वे श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से जुड़े हुए हैं और उनका गुरु स्थान पंजाब के अमृतसर में है। बाबा बताते हैं कि उन्होंने महज 13 साल की उम्र में गृह त्याग कर संन्यास धारण कर लिया था। उन्हें संन्यासी जीवन अपनाए हुए करीब 17 साल हो चुके हैं।
Magh Mela 2026 : भजनों और गीतों से खींच रहे श्रद्धालुओं का ध्यान
सेंट बाबा अपनी मस्ती और फक्कड़ अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। वे भजन और गीतों के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों को सरल शब्दों में लोगों तक पहुंचाते हैं। बाबा का एक गीत इन दिनों खासा चर्चा में है “फैशन चाहे जितना कर लो, चाहे मार लो सेंट, इस जगत में कोई भी नहीं है परमानेंट…”
Magh Mela 2026 : अपने भजनों से बाबा श्रद्धालुओं को न सिर्फ आध्यात्मिक संदेश दे रहे हैं, बल्कि जीवन की नश्वरता का भी अहसास करा रहे हैं। बाबा का मानना है कि सेंट लगाने से संस्कारवान लोगों पर नकारात्मक शक्तियों का असर नहीं होता और जो संन्यास का मार्ग अपना चुका हो, उसे श्मशान जैसे स्थानों से भी कोई भय नहीं रहता।
