Iran-America Tension
Iran-America Tension: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। परमाणु समझौते को लेकर जारी बातचीत और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी कर उन्हें जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है।
सरकार ने कहा है कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक कमर्शियल फ्लाइट या अन्य उपलब्ध साधनों का उपयोग कर शीघ्र सुरक्षित स्थान पर पहुंचें।
Iran-America Tension: 26 फरवरी को जिनेवा में संभावित वार्ता
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर अगली महत्वपूर्ण बैठक 26 फरवरी को जिनेवा में प्रस्तावित है। ओमान के विदेश मंत्री ने इसकी पुष्टि की है। ओमान पहले भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है।
बताया जा रहा है कि वार्ता का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई सहमति बनाना है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 10 से 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी थी कि यदि समझौते पर प्रगति नहीं हुई तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
Iran-America Tension: खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ी
तनाव के बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व में 13 युद्धपोत तैनात किए हैं, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन भी शामिल है। इसके अलावा कई डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट भी क्षेत्र में सक्रिय हैं।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और अपने हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती सैन्य गतिविधियां कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित कर सकती हैं।
Iran-America Tension: ईरान में आंतरिक विरोध प्रदर्शन
ईरान के भीतर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व वाली व्यवस्था के खिलाफ तेहरान और मशहद की कुछ विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन जारी हैं। आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष के कारण छात्र सड़कों पर उतर आए हैं।
ईरान का दावा है कि हालिया अशांति में तीन हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका स्थित संगठन HRANA ने सात हजार से ज्यादा मौतों का आंकड़ा बताया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन यदि हमला हुआ तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
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