छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के लोफंदी गांव में बीते दिनों हुई 9 ग्रामीणों की संदिग्ध मौतों ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए
कांग्रेस की जांच समिति मौके पर पहुंची और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। जांच दल में विधायक अटल श्रीवास्तव, विधायक दिलीप लहरिया, पूर्व विधायक रश्मि सिंह, सियाराम कौशिक, जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
मौतों के पीछे जहरीली शराब या फूड पॉइजनिंग?
गांव में अचानक हुई मौतों को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि फूड पॉइजनिंग या जहरीली शराब के सेवन के कारण यह त्रासदी हुई है, जबकि प्रशासन इस दावे से सहमत नहीं दिख रहा है।
जिला प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच में महुआ शराब के सेवन से मौत की संभावना नहीं पाई गई है। कुछ मामलों में सर्पदंश को भी मौतों की वजह बताया जा रहा है, हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
गांव में पसरा मातम, 5 ग्रामीण अस्पताल में भर्ती
गांव में हुए इस दर्दनाक घटनाक्रम से लोग सदमे में हैं। मरने वालों में ग्राम सरपंच रामाधार सुनहले के भाई रामू सुनहले भी शामिल हैं। इसके अलावा, 5 अन्य गंभीर रूप से बीमार ग्रामीणों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
कांग्रेस ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
इस घटना पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। जांच दल का कहना है कि यदि प्रशासन पहले से सतर्क रहता, तो इतनी मौतें नहीं होतीं। उन्होंने यह भी मांग की है कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक अमला सक्रिय, जांच जारी
घटना के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा टीमों को गांव में भेजा गया है। डॉक्टरों की एक टीम घर-घर जाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर रही है, ताकि किसी और की जान खतरे में न पड़े।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल प्रशासन ने एक शव का पोस्टमॉर्टम करवाया है, और विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों का असली कारण सामने आएगा। ग्रामीणों की मांग है कि सच्चाई सामने लाई जाए और दोषियों को सजा मिले।
इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन और राजनीतिक दलों की गतिविधियों के बीच, गांव में शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है।