Bengal Election: कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों दलबदल का दौर तेज हो गया है। इस बीच भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी बंगाल पर फोकस बनाए हुए है। इसी क्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन दो दिवसीय कोलकाता दौरे पर हैं।
Bengal Election: सुकांत मजूमदार और शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में पिछले दो दिनों में कई नेताओं के भाजपा में शामिल होने से राज्य की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले यह बदलाव राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे सकता है।
Bengal Election: अर्घ्य रॉय प्रधान का टीएमसी से इस्तीफा
मेखलीगंज से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक अर्घ्य रॉय प्रधान ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए अपनी पूर्व पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे अब एक “भ्रष्ट पार्टी” के साथ नहीं रह सकते।
Bengal Election: अर्घ्य रॉय प्रधान ने कहा कि पार्टी की गिरती छवि के कारण वे अपने क्षेत्र की जनता का सामना करने में असहज महसूस कर रहे थे। बता दें कि उनके पिता अमर रॉय प्रधान कूचबिहार से आठ बार सांसद रह चुके हैं, ऐसे में उनका दल बदलना टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
Bengal Election: बंशी बदन बर्मन के आने से भाजपा को मजबूती
अर्घ्य रॉय प्रधान के साथ ही प्रमुख राजबंशी नेता बंशी बदन बर्मन ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय का वोट बैंक काफी प्रभावशाली माना जाता है और बर्मन इस समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक हैं।
Bengal Election: इस मौके पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बर्मन के सुझावों के आधार पर भाजपा उत्तर बंगाल के विकास के लिए नई रणनीति तैयार करेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘उत्तर बंगाल’ और ‘राजबंशी वोट बैंक’ पर पकड़ मजबूत करना भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है।
Bengal Election: कांग्रेस को भी झटका, संतोष पाठक भाजपा में शामिल
कोलकाता में कांग्रेस को भी बड़ा नुकसान हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संतोष पाठक अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। लंबे समय तक कांग्रेस का चेहरा रहे पाठक के इस कदम से चौरंगी विधानसभा सीट पर सियासी समीकरण बदलने की संभावना है।
Bengal Election: सूत्रों के अनुसार, भाजपा उन्हें तृणमूल कांग्रेस की नैना बनर्जी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार सकती है। दोनों के बीच 2021 में भी मुकाबला हो चुका है। कुल मिलाकर, बंगाल में भाजपा नए चेहरों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, जिससे अन्य दलों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
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