Top
Begin typing your search above and press enter to search.
ब्रेकिंग न्यूज़

Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि की महासप्तमी कल: ऐसे करें मां कालरात्रि की उपासना, बरसेगी मां की कृपा, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और भोग

Asian News
Chaitra Navratri
X

Chaitra Navratri

Chaitra Navratri: धर्म डेस्क: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन देवी दुर्गा के उग्र और दिव्य स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है। यह दिन साधना, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि शनि ग्रह के दुष्प्रभावों को शांत करती हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा विशेष फलदायी होती है। उनका स्वरूप भले ही भयावह दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं, इसी कारण उन्हें “शुभंकरी” भी कहा जाता है।

महासप्तमी का महत्व और देवी का स्वरूप

चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि को महासप्तमी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए अपने गौर वर्ण का त्याग किया, तब उनका कालरात्रि रूप प्रकट हुआ। मां का वाहन गधा है और उनकी चार भुजाएं हैं दो हाथों में वरद और अभय मुद्रा, जबकि अन्य दो में खड्ग और लोहे का कांटा होता है।

कौन-सा रंग पहनना होता है शुभ

नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह रंग साहस, आत्मविश्वास और स्थिरता का प्रतीक है। इस दिन नीले वस्त्र धारण कर मां कालरात्रि की पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा ग्रे रंग भी शुभ माना गया है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 24 मार्च शाम 4:08 बजे से 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:53 से 5:40 बजे तक) और अमृत काल (सुबह 9:17 से 10:47 बजे तक) विशेष शुभ हैं।

मंत्र और पूजा विधि

इस दिन स्नान कर विधिपूर्वक पूजा करें और मां को दीप, रोली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। गुड़हल या गुलाब के फूल चढ़ाना शुभ होता है तथा गुड़ का भोग लगाना पुण्यदायी माना गया है। प्रमुख मंत्र: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥”

आध्यात्मिक महत्व और लाभ

मां कालरात्रि की उपासना से भय, नकारात्मक शक्तियां और ग्रह बाधाएं दूर होती हैं। साधक का मन सहस्त्रार चक्र में स्थित होकर आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। उनकी कृपा से शत्रु, अग्नि, जल और रात्रि का भय समाप्त होता है तथा जीवन में साहस और संतुलन आता है।

पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, रक्तबीज नामक राक्षस को मारना कठिन था क्योंकि उसके रक्त की हर बूंद से नया राक्षस उत्पन्न हो जाता था। तब देवी पार्वती ने अपने तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया। उन्होंने अपनी लंबी जिह्वा से रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया और अंततः रक्तबीज का वध कर दिया। इस प्रकार, मां कालरात्रि की उपासना न केवल भय और संकटों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि जीवन में शक्ति, साहस और आध्यात्मिक जागृति भी प्रदान करती है।

मां कालरात्रि की आरती


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019