Anti-aircraft guns
Anti-aircraft guns: नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय सेना ने अपनी सुरक्षा तैयारियों का मजबूत संदेश दिया है। राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान की एयर डिफेंस ब्रिगेड ने हाई-इंटेंसिटी सैन्य अभ्यास किया। इस अभ्यास का उद्देश्य भविष्य के युद्धों में तेजी से बढ़ रहे ड्रोन और स्वार्म हमलों से निपटने की क्षमता को परखना था।
Anti-aircraft guns: हाल के वर्षों में यूक्रेन-रूस और मध्य-पूर्व के संघर्षों ने यह साबित किया है कि कम लागत वाले कामिकेज़ ड्रोन और छोटे मानवरहित विमान बड़े सैन्य ठिकानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए सेना ने पोकरण की रेतीली जमीन पर अपनी एंटी-ड्रोन क्षमताओं का परीक्षण किया।
Anti-aircraft guns: काल्पनिक हमले का परिदृश्य तैयार
अभ्यास के दौरान ऐसा परिदृश्य बनाया गया जिसमें दुश्मन के कई ड्रोन एक साथ भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं। भारतीय एयर डिफेंस यूनिट्स ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पहले इलेक्ट्रॉनिक जैमर की मदद से ड्रोन को निष्क्रिय किया और फिर रडार-गाइडेड एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया।
Anti-aircraft guns: L-70 गन बनी मुख्य आकर्षण
इस सैन्य अभ्यास का मुख्य आकर्षण अपग्रेड की गई L-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन रही। मूल रूप से स्वीडन की बोफोर्स कंपनी द्वारा बनाई गई इस गन को अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने आधुनिक सेंसर और तकनीक से लैस किया है। यह गन प्रति मिनट 240 से 330 राउंड फायर कर सकती है और लगभग 3.5 से 4 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को सटीक रूप से भेद सकती है। थर्मल इमेजर और लेजर रेंज फाइंडर की मदद से यह दिन-रात दोनों समय प्रभावी रहती है।
Anti-aircraft guns: रडार और तकनीक का एकीकृत नेटवर्क
अभ्यास के दौरान सेना ने यह भी दिखाया कि कैसे रडार, कंप्यूटर और गन सिस्टम मिलकर एक इंटीग्रेटेड नेटवर्क की तरह काम करते हैं। उन्नत रडार प्रणालियां दूर से ही लक्ष्यों की पहचान कर कंट्रोल रूम को जानकारी देती हैं, जिसके बाद ऑटोमेटेड कमांड से गन सिस्टम उन्हें कुछ ही सेकंड में नष्ट कर देते हैं।
Anti-aircraft guns: मिशन रेडी का संदेश
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार यह अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि भारत की ‘मिशन रेडी’ रणनीति का हिस्सा है। सीमा क्षेत्रों में इस तरह के अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत की हवाई सुरक्षा मजबूत बनी रहे और देश ड्रोन तकनीक तथा स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
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