Rahul Gandhi : राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत रखीं तीन बड़ी मांगें
Rahul Gandhi: नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और कांग्रेस उनके साथ मजबूती से खड़ी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर तीन मांगों से पीछे नहीं हटेगी। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। दूसरी मांग संसद में पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा कराने की है, ताकि छात्रों और देश के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। तीसरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक माफी मांगने की है।
छात्रों के साथ हुआ व्यवहार स्वीकार नहीं
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का वीडियो भी दिखाया। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। राहुल ने आरोप लगाया कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों के भविष्य को प्रभावित किया है, लेकिन सरकार इस पर जवाबदेही तय करने से बच रही है।
पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें प्रदर्शन स्थल से पुलिस ने जबरन हटाया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने भी निजी तौर पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई, हालांकि उन्होंने कहा कि यह मुख्य मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार असली सवाल छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।
10 वर्षों में 152 पेपर लीक का दावा
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे करोड़ों परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वालों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक पेपर लीक पर सख्त कदम नहीं उठाए जाते और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक वह इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाती रहेगी।