UPSC के 100 साल पूरे: PM मोदी बोले- पब्लिक ऑफिस नहीं, पब्लिक सर्विस से आकर्षित हों युवा
भारत मंडपम में हुआ शताब्दी समारोह
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने 100 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम में शामिल हुए और सभा को संबोधित किया। इस दौरान UPSC की 100 साल की यात्रा पर स्मारक सिक्का, डाक टिकट और 100 महत्वपूर्ण फैसलों पर आधारित पुस्तक जारी की गई।
सरदार पटेल की भूमिका का किया जिक्र
पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को चलाने और उसके पुनर्निर्माण के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी थी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को मजबूत करने में सरदार पटेल की अहम भूमिका रही और UPSC स्वतंत्र भारत के प्रमुख संस्थानों में शामिल रहा।
सुभाष चंद्र बोस का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने UPSC की ऐतिहासिक यात्रा का जिक्र करते हुए सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 1920 में बोस भी उस समय की सिविल सेवा चयन प्रक्रिया से गुजरे थे। मोदी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था समय के साथ लगातार बदलती रही है।
बोले- Public Office नहीं, Public Service
पीएम मोदी ने कहा, "हमें ऐसे युवाओं को Public Services में लाना होगा, जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों।" उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा केवल यह न परखे कि उम्मीदवार कितना जानता है, बल्कि यह भी देखे कि वह Civil Services में आना क्यों चाहता है।
दो सिद्धांत- Nation First और Citizen First
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है। एक - Nation First. दूसरी - Citizen First." उन्होंने नागरिक सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा, "हमारा मंत्र है... नागरिक देवो भव।" मोदी ने कहा कि 100 साल में पीढ़ियां, सरकारें, तकनीक और सिलेबस बदले, लेकिन UPSC पर लोगों का भरोसा कायम रहा।