Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, अब तक 100 से अधिक शव बरामद; 133 भारतीय समेत 403 लोग लापता
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेंसी इलाकों में देखा गया। इसके बाद पानी त्रिशूली नदी की ओर बढ़ा और नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन समेत कई क्षेत्रों में भी खतरा बढ़ गया।
काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी की अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बुधवार को आई फ्लैश फ्लड से कई बस्तियां, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक शाम तक 72 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
133 भारतीय नागरिक भी लापता
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार रसुवा बाढ़ के बाद 403 पर्यटकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें 341 विदेशी नागरिक और 62 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं। इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, मलेशिया और अन्य देशों के नागरिक भी शामिल हैं। पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता लोगों में 203 महिलाएं और 200 पुरुष हैं। कई लोग कैलाश मानसरोवर और अन्य तीर्थ यात्राओं के लिए इस इलाके में पहुंचे थे।
250 से ज्यादा लोगों को किया गया रेस्क्यू
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राहत और बचाव अभियान में नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस को लगाया है। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के बावजूद हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने का अभियान जारी है। नेपाल सरकार ने घायलों के इलाज और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए हैं। नेपाल सेना ने अब तक दर्जनों लोगों को सुरक्षित निकाला है। खराब मौसम के कारण कुछ राहत उड़ानों को वापस लौटना पड़ा, जिससे बचाव अभियान और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भोटेकोशी की बाढ़ से कई जिलों में तबाही
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेंसी इलाकों में देखा गया। इसके बाद पानी त्रिशूली नदी की ओर बढ़ा और नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन समेत कई क्षेत्रों में भी खतरा बढ़ गया। कई जगह पुल और सड़कें बह गईं, जिससे राहत टीमों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान
भोटेकोशी नदी की तेज धार ने कई जलविद्युत परियोजनाओं और उनके बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कुछ परियोजनाओं से जुड़े दर्जनों कर्मचारियों का भी संपर्क टूट गया है। इसके अलावा रसुवा में कई बैंक शाखाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं और कई कर्मचारी अभी संपर्क में नहीं हैं।
बाढ़ के कारणों की जांच जारी
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों में आशंका जताई गई है कि तिब्बत सीमा के पास बर्फीले हिमस्खलन या किसी ग्लेशियल अवरोध के टूटने से नदी में अचानक पानी बढ़ा हो सकता है। अधिकारियों ने अभी बाढ़ के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और अलग-अलग एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं।
भारत और चीन ने मदद की पेशकश की
आपदा के बाद नेपाल को भारत, चीन, अमेरिका और विश्व बैंक समेत कई पक्षों से मदद की पेशकश मिली है। नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत, चिकित्सा सुविधा और बुनियादी ढांचे की बहाली को प्राथमिकता दी है। नेपाल में हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। मौतों और लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित है और राहत दलों की पहुंच सीमित है। बचाव एजेंसियां लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।