नई दिल्ली। आजादी से पहले शुरू हुई किशाऊ बांध परियोजना को आखिरकार 86 साल बाद मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली में छह राज्यों के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

किशाऊ बांध परियोजना का प्रस्ताव वर्ष 1940 में तैयार किया गया था, लेकिन पानी के बंटवारे, लागत और तकनीकी मुद्दों को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण यह योजना दशकों तक लंबित रही। अब सभी पक्षों की सहमति के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

छह राज्यों को मिलेगा परियोजना का लाभ

समझौते के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को अलग-अलग रूप में लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि छह राज्यों की सहमति और समझौते पर हस्ताक्षर होना इस परियोजना के लिए बड़ी उपलब्धि है। अमित शाह ने परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को बधाई दी।

यमुना के लिए छोड़ा जाएगा अतिरिक्त जल

अमित शाह ने कहा कि यमुना जल बंटवारे के दौरान एक बड़ी कमी रह गई थी। उन्होंने बताया कि नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को ध्यान में नहीं रखा गया और उपलब्ध पानी का बंटवारा कर दिया गया, जिससे नदी के लिए पर्याप्त जल नहीं बचा।

उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना के जरिए मिलने वाला करीब 25 प्रतिशत जल दिल्ली और यमुना नदी दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे जल उपलब्धता बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

जल संकट और यमुना सफाई अभियान को मिलेगी मजबूती

केंद्र सरकार के अनुसार, किशाऊ बांध परियोजना से जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा दिल्ली सहित कई क्षेत्रों में पानी की जरूरतों को पूरा करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यमुना की सफाई को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यमुना की स्वच्छता का सीधा संबंध गंगा की स्वच्छता से भी है, क्योंकि यमुना प्रयागराज में जाकर गंगा में मिलती है।

दशकों पुराने विवाद का हुआ समाधान

किशाऊ बांध परियोजना लंबे समय से राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण अटकी हुई थी। अब छह राज्यों के बीच हुए समझौते के बाद परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना जल सुरक्षा, सिंचाई, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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