41 साल के मरीज की पित्त की थैली से निकलीं 4 हजार से ज्यादा पथरियां, 45 मिनट की सर्जरी हुई सफल

फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में डॉक्टरों ने हाई-रिस्क मरीज की सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की।

Update: 2026-08-16 10:03 GMT

फरीदाबाद। फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में डॉक्टरों ने हाई-रिस्क मरीज की सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की। मरीज की पित्त की थैली में 4 हजार से अधिक माइक्रोस्कोपिक गॉलस्टोन्स और गाढ़ा बाइलरी स्लज पाया गया था।


तेज पेट दर्द और उल्टी के बाद अस्पताल पहुंचा मरीज

फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में 41 वर्षीय व्यक्ति की पित्त की थैली से 4 हजार से अधिक पथरियां निकालकर डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। अस्पताल के मुताबिक, मरीज करीब एक सप्ताह से तेज पेट दर्द, उल्टी और गंभीर अपच की समस्या से परेशान था। लगातार बढ़ते दर्द के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच में गॉल ब्लैडर में गंभीर सूजन के साथ बड़ी संख्या में माइक्रोस्कोपिक पथरियां और गाढ़ा बाइलरी स्लज मिला।

पहले से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था मरीज

मरीज की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि वह मोटापे के साथ टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया जैसी समस्याओं से भी जूझ रहा था। उसका BMI करीब 46 था। इसके अलावा उसे एक्यूट किडनी इंजरी की गंभीर समस्या थी और डायलिसिस की जरूरत भी पड़ रही थी। ऐसे में सर्जरी और एनेस्थीसिया दोनों को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी था।

संक्रमण और गॉल ब्लैडर फटने का था खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, पित्त की थैली में इतनी अधिक संख्या में पथरियां होने से संक्रमण, गॉल ब्लैडर में गंभीर जटिलता और बाइल डक्ट में रुकावट का खतरा बढ़ गया था। मरीज की अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उपचार के लिए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने आगे की रणनीति तैयार की।

करीब 45 मिनट में पूरी हुई लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

सीनियर डायरेक्टर जीआई, मिनिमल एक्सेस एंड बेरियाट्रिक सर्जरी डॉ. बीडी पाठक के नेतृत्व में मरीज की मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। सामान्य एनेस्थीसिया के तहत करीब 45 मिनट में प्रक्रिया पूरी की गई। सर्जिकल टीम के साथ नेफ्रोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों ने भी मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी।

अगले दिन अस्पताल से मिली छुट्टी

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। अस्पताल के अनुसार, ऑपरेशन के अगले ही दिन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज दर्द से राहत के बाद सामान्य रूप से चलने-फिरने लगा।

हाई-रिस्क मरीज में चुनौतीपूर्ण था ऑपरेशन

डॉ. बीडी पाठक ने बताया कि अत्यधिक संख्या में गॉलस्टोन्स के साथ 46 BMI और एक्यूट किडनी फेलियर से जूझ रहे मरीज की सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। उनके मुताबिक, मिनिमल एक्सेस तकनीक से सर्जिकल ट्रॉमा और एनेस्थीसिया का समय कम रखने में मदद मिली, जिससे हाई-रिस्क मरीज में संभावित जटिलताओं को कम करने में सहायता मिली।

अस्पताल के फेसिलिटी डायरेक्टर डॉ. अभिषेक शर्मा ने कहा कि यह मामला सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर और एनेस्थीसिया टीमों के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीज में समय पर निर्णय और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय उपचार की सफलता में अहम रहा।

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