Delhi Police report: छात्रों के सांसद मार्च में झड़प क्यों हुई? दिल्ली पुलिस ने बताई पूरी कहानी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों के सांसद मार्च के दौरान हुए भारी हंगामे और पुलिस कार्रवाई पर दिल्ली पुलिस ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी कर दी है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर हफ्तों से चल रहा शांतिपूर्ण धरना उस वक्त तीखे टकराव में बदल गया, जब प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने हाई-सिक्योरिटी जोन की तरफ अनधिकृत मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को 'चरणबद्ध, संयमित और सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी' कार्रवाई करार दिया है।
बिना अनुमति के था संसद मार्च
पुलिस के मुताबिक, संसद सत्र के दौरान इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों और असामाजिक तत्वों ने जंजीरों से बंधे लोहे के बहुस्तरीय बैरिकेड्स तोड़ दिए। इस दौरान कई पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। मीडियाकर्मियों को टारगेट कर हूटिंग और बदसलूकी की गई। सुरक्षा घेरा बनाए रखने की कोशिश कर रहे वरिष्ठ व उम्रदराज पुलिस अधिकारियों को घेरकर धक्का-मुक्की की गई, जिससे वे घायल हो गए।
BNS की धारा 163 थी लागू
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और आलोचनाओं का जवाब देते हुए पुलिस ने घटनाओं का पूरा क्रम (सीक्वेंस) साझा किया है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई से पहले इलाके में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू होने की घोषणा लाउडस्पीकर के जरिए की गई थी। भीड़ से तय सीमा के भीतर रहने की लगातार अपील की गई।
कैसे बढ़ा तनाव और क्यों करना पड़ा बल प्रयोग?
पुलिस ने बताया कि शुरुआत में स्थिति को संभालने के लिए संयम बरता गया। पुलिस ने बहुस्तरीय बैरिकेड्स के पीछे स्थिर मानव श्रृंखला बनाई. भीड़ द्वारा बैरिकेड्स पर चढ़ने पर पहले हल्का बल (धक्का-मुक्की) और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, लाठी का नहीं। भीड़ की तरफ से लगातार पथराव होने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद ही, बैरिकेड्स तोड़ने वाले हमलावरों पर लक्षित लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए
बार-बार की गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया
बल का इस्तेमाल तभी किया गया, जब बार-बार की गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और एक के बाद एक कई बैरिकेड तोड़ दिए गए. जैसे ही भीड़ तितर-बितर हुई और तत्काल खतरा टला, बल प्रयोग तुरंत रोक दिया गया। दिल्ली पुलिस का दावा है कि भारी उकसावे के बावजूद पुलिसकर्मियों ने अत्यधिक संयम बरता, इस पूरी घटना में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने इस मामले की औपचारिक समीक्षा और आंतरिक जांच शुरू कर दी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बल प्रयोग कितना उचित था और क्या ड्यूटी पर तैनात किसी स्तर पर कोई चूक हुई है या नहीं।