Jhiram Valley Naxal Attack Verdict: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी में नक्सली हमले मामले में कांग्रेस नेताओं की हत्या के मामले में NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को गुनहगार माना है। दोषी पाए गए आरोपियों में ज्योती उर्फ प्रमिला कोड़ियम (महिला आरोपी), बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम, मुक्का मंडावी, मड़कामी, देवा कवासी, कोसा चैतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग, सुमित्रा शामिल हैं। कुल 11 के खिलाफ मामला दर्ज था, जिसमें से एक की मृत्यु हो चुकी है। आरोपियों को सजा सुनाने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई है।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए थे। बता दें कि, 10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन पक्ष ने सबूतों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी है।

25 मई को क्या हुआ था झीरम घाटी हमले में

दरअसल, 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जीत के लिए जोर लगा रही थी। पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई।

रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे।

कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप एक काफिले में थी

साथ ही उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा।

यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही।

महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने मारी थी 100 गोलियां

शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं।

चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी। (खबर अपडेट की जा रही है।)

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