CG News : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बालोद में चेतना विकास एवं मूल्य शिक्षा कार्यशाला का सफल समापन
बालोद। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य मे मानवीय मूल्यों की शिक्षा को प्रोन्नत करने बालोद जिले के संकुल केंद्र मोंगरी के शिक्षकों का चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला अभिभावक विद्यालय उत्सवपारा सांकरी में दिनांक 20.04.2026 से 24.04.2026 तक (5 दिवसीय) प्रबोधक – गौरीकान्ता साहू, अमीता सोनवानी, कॄष्णमोहन पटेल के द्वारा दिया गया ।
आज समापन के अवसर पर SCERT से चेतना विकास मूल्य शिक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी के के साहू जी पूरे समय उपस्थित रहे।
1.मानव मे व्यवस्था – मानव शरीर व जीवन का संयुक्त रूप है, शरीर सीमित है इसलिए उसकी आवश्यकता भी सीमित है जैसे आहार, आवास, अलंकार (सामान्य आकांक्षा ) तथा परिवार व समाज व्यवस्था मे भागीदारी के लिए दूरगमन, दूरश्रवण, दूरदर्शन (महत्वाकांक्षा ) है । इनको श्रम पूर्वक उत्पादन करके प्राप्त कर सकते है ।
2.जीवन निरन्तर है इसलिए उसकी भावनात्मक आवश्यकता भी निरन्तर है Iजो मूल्यो को समझकर ,मूल्यो का निर्वाह करके तृप्ति पूर्वक जी सकते है, जो चेतना विकास मूल्य शिक्षा से होता है I
परिवार मे व्यवस्था
परिवार व समाज मे संबंध होतें, जो पूर्णता के अर्थ मे होते है ।
परिवार व्यवस्था पर चर्चा करते हुए परिवार की आवश्यकता क्यो? परिवार क्या ? परिवार कितना ? जीवन मूल्य ,मानव मूल्य ,वस्तु मूल्य ,स्थापित मूल्यो (30 ) की रिविजन के साथ ही समाज मे व्यवस्था के आयाम 1. शिक्षा संस्कार, 2. स्वास्थ्य संयम, 3ं. उत्पादन कार्य , 4. विनिमय कोष, 5. न्याय सुरक्षा आयाम पर चर्चा की गई ।
श्रेष्ठता = दुसरों के होनें में ही मेरा होना संभव है।
विशेषता _ मेरा होना =दूसरों का न होना ।
प्रतियोगिता = स्वयं का ,स्वयं से ,स्वयं के लिए पूर्णता के अर्थ मे योग है ।
अस्तित्व मे व्यवस्था ,संपृक्तता संबोधन सहयोग आज्ञा पालन, नियंत्रण,पंचकोटी के मानव आदि कई महत्वपूर्ण सूत्रों पर संवाद हुआ ।
सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को प्रत्येक मानव के लिए अत्यन्त उपयोगी बताया ।
इस अवसर पर मोंगरी संकुल के सभी विद्यालयों की सहभागिता रही जिसमें मोंगरी संकुल के संकुल समन्वयक ओमकार प्रसाद पटौदी, लोकेश यादव, लक्ष्य फेलोशिप के युवा ताम्रध्वज साहूं तथा प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं के प्रधानपाठक, शिक्षक व अभिभावक विद्यालय उत्सवपारा की अध्यापिकाजी उपस्थित रही।

