SC: नई दिल्ली: भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत कार्यरत महिला अधिकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि सेना में महिलाओं के साथ लंबे समय से प्रणालीगत भेदभाव होता रहा है, जिसके कारण उन्हें स्थायी कमीशन (Permanent Commission) से वंचित किया गया। इस मामले में कोर्ट ने अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए प्रभावित महिला अधिकारियों के पक्ष में निर्णय दिया।
SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन महिला अधिकारियों ने अपनी सेवा समाप्ति को अदालत में चुनौती दी थी, उन्हें 20 वर्षों की सेवा के बराबर पेंशन का अधिकार मिलेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं को स्थायी कमीशन न मिल पाने के पीछे भेदभावपूर्ण व्यवस्था जिम्मेदार रही है, जिससे उनके करियर और योग्यता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
SC: कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सेना केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं हो सकती और पुरुष अधिकारी यह अपेक्षा नहीं कर सकते कि सभी अवसर केवल उन्हें ही मिलें। यह फैसला उन महिला अधिकारियों के लिए एक विशेष राहत के रूप में है, जो कानूनी प्रक्रिया के दौरान सेवा से बाहर हो चुकी थीं। हालांकि, यह आदेश जेएजी और एईसी कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, कोर्ट ने भविष्य में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के लिए चयन प्रक्रिया की समीक्षा के निर्देश भी दिए हैं।
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