Iran Economy Crisis
Iran Economy Crisis: ईरान में गहराते आर्थिक संकट ने एक बार फिर जनता के आक्रोश को सड़कों पर ला दिया है। कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान से निकलकर देश के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों तक फैल चुके हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में अब तक कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इन घटनाओं के बाद आशंका जताई जा रही है कि ईरान की धार्मिक सरकार आंदोलन को कुचलने के लिए और सख्त कदम उठा सकती है।
Iran Economy Crisis: हालांकि तेहरान में विरोध की तीव्रता कुछ कम होती दिख रही है, लेकिन अन्य प्रांतों में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। खासकर उन इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहां लूर जातीय समुदाय की आबादी अधिक है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को एक और गुरुवार को दो लोगों की मौत ऐसे ही क्षेत्रों में हुई है। ये प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं, जब महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में व्यापक आंदोलन हुआ था। मौजूदा आंदोलन उस स्तर तक तो नहीं पहुंचा है, लेकिन इसमें भी सरकार विरोधी नारों और गहरे असंतोष की झलक साफ दिखाई दे रही है।
Iran Economy Crisis: चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान शहर से सामने आए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें सड़कों पर जमा प्रदर्शनकारी और पृष्ठभूमि में गोलियों की आवाजें सुनी जा सकती हैं। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, गुरुवार को हुई झड़पों में दो लोगों की मौत हुई, जिसकी पुष्टि वाशिंगटन स्थित अब्दोर्रहमान बोरौमंद सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने भी की है। संगठन ने एक तस्वीर साझा की है, जिसमें दंगा-रोधी कवच और हथियार से लैस ईरानी पुलिसकर्मी नजर आ रहा है।
Iran Economy Crisis: इसके अलावा बुधवार रात को भी एक 21 वर्षीय युवक की मौत की खबर सामने आई है, जो कथित तौर पर अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के बासिज बल से जुड़ा था। सरकारी एजेंसी आईआरएनए ने गार्ड सदस्य की मौत की पुष्टि की है, जबकि स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क ने इसके लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। लोरेस्टान प्रांत के उप राज्यपाल सईद पौराली के मुताबिक, बासिज के 13 अन्य सदस्य और कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
Iran Economy Crisis: विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर और दबाव बढ़ा है, ऐसे में ये विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं।
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