Raajy Preranageet Puraskar
Raajy Preranageet Puraskar: मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर स्थापित प्रथम ‘राज्य प्रेरणागीत पुरस्कार’ का भव्य वितरण समारोह सोमवार को मुंबई स्थित ‘वर्षा’ शासकीय निवास में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस पुरस्कार से स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा रचित कालजयी प्रेरणादायक गीत “अनादि मी… अनंत मी…” को सम्मानित किया गया। यह गीत राष्ट्रभक्ति, आत्मबोध और वैचारिक दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम काल से अब तक अनेक पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
Raajy Preranageet Puraskar: गीत को मिला साहित्य और संस्कृति का सम्मान
राज्य सरकार के अनुसार, इस पुरस्कार का उद्देश्य समाज को ऊर्जावान और जागरूक बनाने वाले गीतों की रचना को प्रोत्साहन देना है। स्वातंत्र्यवीर सावरकर प्रतिष्ठान की ओर से रणजित सावरकर, अशीलता राजे, स्वप्निल सावरकर, मंजिरी मराठे और अविनाश धर्माधिकारी ने मंच पर उपस्थित होकर यह सम्मान स्वीकार किया। इस अवसर पर अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस ने सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के लिए ₹2 लाख की आर्थिक सहायता का चेक प्रतिष्ठान को सौंपा, ताकि स्मारक की गतिविधियों और रख-रखाव को और मजबूती मिल सके।
Raajy Preranageet Puraskar: संभाजी महाराज: विचार, विद्वत्ता और बलिदान के प्रतीक
सांस्कृतिक कार्य मंत्री अॅड. आशिष शेलार ने अपने संबोधन में कहा, “छत्रपति संभाजी महाराज केवल वीर योद्धा ही नहीं थे, बल्कि वे एक विचारशील, निर्भीक और साहित्यप्रेमी राजा भी थे। उनके जीवन से हमें संघर्ष, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा मिलती है।” उन्होंने आगे कहा, “‘अनादि मी, अनंत मी…’ गीत केवल साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति और आत्मबल का प्रतीक है। ऐसे गीतों को सम्मानित करना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।”

Raajy Preranageet Puraskar: उपस्थित रहे अनेक गणमान्य अतिथि
समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पणन मंत्री जयकुमार रावल, विधायक संजय उपाध्ये, सांस्कृतिक कार्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे, संचालनालय के संचालक विभीषण चवरे सहित अनेक अधिकारी, साहित्यकार, सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रतिनिधि व आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। राज्य प्रेरणागीत पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे गीतों को सम्मानित करना है, जो समाज को जागरूक, संगठित और प्रेरित करने की क्षमता रखते हैं। यह सम्मान साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्जागरण की दिशा में एक सार्थक पहल है।


