नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ‘J&K and Ladakh Through the Ages’ पुस्तक का विमोचन करते हुए इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान लिखा गया इतिहास गलत था और लुटियन दिल्ली में बैठकर इतिहास नहीं लिखा जा सकता। इतिहास को प्रमाण के आधार पर लिखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अब शासकों को खुश करने के लिए इतिहास लिखने का वक्त खत्म हो चुका है।
कश्मीर में भारतीय संस्कृति की नींव
अमित शाह ने कहा कि कश्मीर का नाम ऋषि कश्यप के नाम से हो सकता है। उन्होंने शंकराचार्य, सिल्क रूट और हेमिष मठ का उदाहरण देते हुए कहा कि कश्मीर भारत की संस्कृति की नींव है। उन्होंने यह भी बताया कि कश्मीर में सूफी, बौद्ध और शैल मठों ने शानदार विकास किया, जो इसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है।
स्थानीय भाषाओं को मिली स्वीकृति
गृह मंत्री ने कश्मीरी, डोगरी, बालटी और झंस्कारी भाषाओं को स्वीकृति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का यह कदम कश्मीर की स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में अहम है।
कश्मीर और लद्दाख के विकास पर फोकस
अमित शाह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर की छोटी से छोटी भाषा और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का आग्रह किया, जो उनके कश्मीर के प्रति गहरे जुड़ाव को दिखाता है।
इस पुस्तक विमोचन के मौके पर गृह मंत्री ने इतिहासकारों से अपील की कि वे प्रमाणों और तथ्यों के आधार पर देश के गौरवशाली इतिहास को फिर से लिखें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही जानकारी मिले।

