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जब मंच पर चप्पल की माला लेकर पहुंचे पूर्व मंत्री खुर्शीद आलम, जानें पूरा मामला.....

Uma Verma
जब मंच पर चप्पल की माला लेकर पहुंचे पूर्व मंत्री खुर्शीद आलम, जानें पूरा मामला.....
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पूर्व मंत्री खुर्शीद आलम

बिहार : बिहार के पूर्व मंत्री खुर्शीद आलम ने बेतिया में एक अनोखे अंदाज में जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वे चप्पल और जूतों की माला लेकर मंच पर पहुंचे, जिससे वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि अगर जनता को लगता है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सही काम किए हैं, तो उन्हें सम्मान दिया जाए, वरना चप्पल-जूतों की माला पहनाकर वापस भेज दिया जाए।

अपने कार्यकाल का दिया हिसाब

बेतिया के सिकटा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक सम्मान समारोह में खुर्शीद आलम ने अपने दस साल के राजनीतिक कार्यकाल की समीक्षा करते हुए जनता के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पांच साल विधायक और पांच साल मंत्री के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र में कई विकास कार्य कराए हैं। उन्होंने कहा कि वह जनता की अदालत में खड़े हैं, और अगर किसी को लगता है कि उन्होंने कुछ गलत किया है, तो उनका विरोध करें, वरना उनके काम को सराहा जाए।

सिक्कों से तौला गया, जनता ने दिया सम्मान

इस अनोखे अंदाज के बावजूद समारोह में मौजूद समर्थकों ने उन्हें एक क्विंटल सात किलो सिक्कों से तौलकर सम्मानित किया। खुर्शीद आलम, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं, अपने क्षेत्र में हमेशा अपने अलग अंदाज के लिए चर्चा में रहते हैं।

मंच से दिया बड़ा बयान

खुर्शीद आलम ने कहा,"अगर मैं सम्मान के लायक हूं तो मुझे सम्मान दीजिए, नहीं तो मुझे चप्पल-जूतों की माला पहनाकर वापस भेज दीजिए।"उन्होंने अपने कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने निजी खर्च से 64 छोटे-बड़े मंदिरों का निर्माण कराया है।

बाइक रैली के साथ पहुंचे थे कार्यक्रम में

रविवार को बेतिया के बैशाखवा में एक स्कूल में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। खुर्शीद आलम बाइक रैली के साथ वहां पहुंचे और मंच पर पहुंचते ही उनकी चप्पल की माला ने सभी का ध्यान आकर्षित कर लिया।

जनता के फैसले पर छोड़ा अपना सम्मान

खुर्शीद आलम ने यह भी कहा कि वह जनता के फैसले का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने मंच से साफ कहा, "अगर मैंने गलत काम किया है, तो मुझे सिक्कों से तौलने की जरूरत नहीं, बल्कि चप्पलों की माला पहनाकर वापस भेज दीजिए।"उनकी इस अनोखी शैली ने जनता और राजनीतिक हलकों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।


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