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UP: यूपी में परियोजनाओं की रफ्तार तेज, 50 करोड़ तक मंत्री दे सकेंगे स्वीकृति; लखनऊ में बनेगा सात भव्य प्रवेश द्वार

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UP: लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्त विभाग की समीक्षा के दौरान वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब विभागीय मंत्री 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की स्वीकृति दे सकेंगे, जो पहले 10 करोड़ तक सीमित थी। 50 से 150 करोड़ रुपये तक की योजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर से होगी, जबकि 150 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर पर दी जाएगी।

UP: शुक्रवार को बैठक में सीएम योगी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें। समयसीमा न मानने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होने पर कारण बताकर पुनः अनुमोदन लें। सीएम ने राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, डिजिटल सुधार, कोषागार प्रक्रिया, पेंशन व्यवस्था और राज्य गारंटी पॉलिसी (केंद्र की तर्ज पर) लागू करने पर भी जोर दिया।

UP: इसके अलावा, लखनऊ को सांस्कृतिक-आध्यात्मिक स्वरूप देने के लिए शहर के सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य द्वार बनाए जाएंगे। ये द्वार प्रदेश की विरासत के प्रतीक होंगे, जिनमें भारतीय वास्तुकला, नक्काशी, म्यूरल, फव्वारे और हरित परिदृश्य शामिल होंगे। निर्माण के लिए सीएसआर फंड का उपयोग होगा और संबंधित विभाग (सड़क वाली) जिम्मेदार होंगे।

UP: द्वारों के नाम इस प्रकार होंगे: प्रयागराज मार्ग पर 'संगम द्वार' (त्रिवेणी और महाकुंभ), वाराणसी मार्ग पर 'नंदी द्वार' (काशी विश्वनाथ), अयोध्या मार्ग पर 'सूर्य द्वार' (श्रीराम-सूर्यवंश), नैमिषारण्य मार्ग पर 'व्यास द्वार', हस्तिनापुर मार्ग पर 'धर्म द्वार', मथुरा मार्ग पर 'कृष्ण द्वार' और झांसी मार्ग पर 'शौर्य द्वार'। ये द्वार राजधानी में प्रवेश करते ही यूपी की धार्मिक-ऐतिहासिक पहचान दिखाएंगे।


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