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UP News : धर्म की प्रेरणा और जीवन का सार है श्रीमद्भगवद्गीता- सीएम योगी आदित्यनाथ

Dev Verma
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UP News : लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोमती नगर के जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और भगवान की दिव्य वाणी है। इसके 18 अध्यायों के 700 श्लोक हर सनातन धर्मावलंबी के लिए जीवन मंत्र हैं। गीता धर्म से शुरू होती है और धर्म पर ही समाप्त होती है, क्योंकि भारत ने धर्म को कर्तव्य से जोड़कर देखा है। सीएम ने श्लोक “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे…” का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में कहीं युद्ध का मैदान भी धर्मक्षेत्र कहलाता हो, ऐसा शायद ही कहीं देखने को मिले, क्योंकि हमारे यहां हर कर्तव्य को पवित्र भाव से जोड़ा गया है।

UP News : मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने कभी अपनी उपासना पद्धति को सर्वश्रेष्ठ बताने का दंभ नहीं किया। “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “जियो और जीने दो” की प्रेरणा यहीं से निकली है। यही कारण है कि युद्ध का मैदान भी हमारे लिए धर्मक्षेत्र बना, क्योंकि वहां भी कर्तव्य के लिए लड़ाई हो रही थी। अंत में गीता का संदेश स्पष्ट है – “यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः, तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम” यानी जहां धर्म और कर्तव्य है, वहीं विजय निश्चित है। अधर्म की कभी जीत नहीं हो सकती।

UP News : सीएम योगी ने निष्काम कर्म की शिक्षा को आज के परिप्रेक्ष्य में सबसे प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने फल की चिंता किए बिना कर्म करने की प्रेरणा दी। “स्वधर्मे निधनं श्रेयः” का संदेश देते हुए कहा कि अपने कर्तव्य पर मर जाना भी श्रेयस्कर है, परंतु स्वार्थ के लिए कर्तव्य से भटकना पतन का कारण बनता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को निष्काम कर्म का जीवंत उदाहरण बताते हुए सीएम ने कहा कि संघ पिछले 100 वर्षों से बिना किसी लोभ-लालच के समाज सेवा कर रहा है। कोई विदेशी फंडिंग नहीं, सिर्फ समाज के सहयोग से खड़ा यह संगठन हर पीड़ित की मदद को अपना कर्तव्य मानता है, चाहे उसकी जाति, मत या भाषा कुछ भी हो।

UP News : मुख्यमंत्री ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज के “जियो गीता” अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने गीता को आमजन की भाषा में श्रमिक, किसान, महिला, छात्र, सैनिक, चिकित्सक, वकील तक पहुंचाया है। गीता केवल जेल के कैदियों के लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों के लिए दिव्य मंत्र है। इसे हर व्यक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महंत, गीता प्रेमी और आमजन मौजूद रहे।


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