Trump's tariffs: फैसले की रात, दुनिया की नजर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर, ट्रंप टैरिफ की वैधता पर आएगा डिसीजन
वाशिंगटन/ नई दिल्ली। US Supreme Court will rule today on legality of Trump’s tariffs: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जल्द ही एक बेहद अहम व्यापारिक मामले पर फैसला सुनाने वाला है, जिसका असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, वित्तीय बाजारों और भारत जैसे प्रमुख निर्यातक देशों पर भी पड़ेगा। यह मामला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर लगाए गए टैरिफ की वैधता से जुड़ा है। हालांकि मामला तकनीकी कानूनी सवालों पर आधारित है, लेकिन इसके नतीजे दुनिया भर के शेयर बाजारों, कंपनियों के मुनाफे, ब्याज दरों और सरकारी राजस्व को प्रभावित कर सकते हैं।
Trump’s tariffs: क्या तय करेगा सुप्रीम कोर्ट
- क्या राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ लगा सकते हैं?
ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाए थे और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट अब यह तय करेगा कि क्या यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति देता है।
भारत के लिए यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि इसी कानून के तहत भारत पर 50% तक टैरिफ लगाए गए थे।
- अगर टैरिफ अवैध ठहरते हैं तो क्या आयातकों को रिफंड मिलेगा?
अगर कोर्ट यह मानता है कि IEEPA का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो अरबों डॉलर का टैरिफ चुका चुके आयातकों को रिफंड देने का सवाल भी उठेगा। हालांकि कोर्ट कोई संतुलित फैसला भी दे सकता है, जिसमें आपातकालीन शक्तियों की सीमा तय की जाए लेकिन मौजूदा टैरिफ व्यवस्था को पूरी तरह खत्म न किया जाए।
3.अगर ट्रंप प्रशासन हारता है तो आगे क्या?
अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है, तब भी टैरिफ पूरी तरह खत्म होना तय नहीं है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार के पास 1962 के ट्रेड एक्ट जैसे वैकल्पिक कानूनी रास्ते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कोर्ट का फैसला “मिले-जुले” स्वरूप का हो सकता है, जिसमें राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हों लेकिन टैरिफ से मिलने वाला कुल राजस्व बहुत ज्यादा प्रभावित न हो।
Trump’s tariffs: भारत के लिए क्या होंगे मायने
अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप टैरिफ के खिलाफ फैसला देता है तो यह भारत के लिए तात्कालिक आर्थिक राहत साबित हो सकता है। कपड़ा, आभूषण और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों पर लगे 50% तक के भारी टैरिफ से राहत मिलने के आसार हैं। भारतीय कंपनियों को अरबों डॉलर के रिफंड की संभावना भी बन सकती है, जिससे निर्यात में आई गिरावट थम सकती है और शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है। इसके अलावा, यह फैसला भविष्य में रूसी तेल खरीद जैसे मुद्दों पर भारत पर लगाए जा सकने वाले 500% तक के दंडात्मक टैरिफ को कानूनी रूप से सीमित कर सकता है।
Trump’s tariffs: भारतीय शेयर बाजारों में सतर्कता
इस फैसले से पहले भारतीय शेयर बाजारों में भी सतर्कता दिखी। 9 जनवरी को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार पांचवें दिन गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 604.72 अंक (0.72%) गिरकर 83,576.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 193.55 अंक (0.75%) लुढ़ककर 25,683.30 पर आ गया। निवेशकों की चिंता भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी और 500% तक संभावित टैरिफ को लेकर बनी हुई है।
Trump’s tariffs: सिर्फ व्यापार नहीं, सत्ता संतुलन का भी सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यह तय होगा कि भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति आर्थिक नीतियों में आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कितनी दूर तक कर सकते हैं। अगर कोर्ट सख्त रुख अपनाता है तो व्यापार नीति पर कांग्रेस की निगरानी बढ़ेगी और आपातकालीन कानूनों की सीमाएं स्पष्ट होंगी। विश्लेषकों के अनुसार, कोर्ट के पास ऐसा फैसला देने की गुंजाइश है जिससे मौजूदा टैरिफ ढांचा काफी हद तक बना रहे, लेकिन उसका कानूनी आधार सीमित हो जाए। बता दें ट्रंप के फैसले से अमेरिका में महंगाई नियंत्रित रही है और व्यापार घाटा भी तेजी से घटा है। अक्टूबर में यह 2009 के बाद के निचले स्तर पर पहुंच गया।
Discover more from ASIAN NEWS BHARAT - Voice of People
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


