सूरजपुर : ओबीसी महासभा ने आज सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण में कटौती के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए ओबीसी समाज के लोगों ने रैली निकालकर अग्रसेन चौक पर आमसभा आयोजित की और सरकार से अपने अधिकारों को वापस करने की मांग की।
ओबीसी आरक्षण शून्य होने पर नाराजगी
ओबीसी महासभा ने सरगुजा और बस्तर में ओबीसी आरक्षण को शून्य किए जाने को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की। महासभा का कहना है कि पंचायत राज संशोधन अध्यादेश 2024 में धारा 129 (ड) की उपधारा (3) को हटाने के कारण इन क्षेत्रों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। इससे जिला, जनपद और पंचायत स्तर पर ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा।
संवैधानिक अधिकारों का हनन
ओबीसी महासभा ने इसे संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन बताया है। महासभा के नेताओं ने कहा कि यह फैसला ओबीसी समाज के हितों के खिलाफ है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कोर्ट जाने और सड़क पर लड़ाई लड़ने की तैयारी
- ओबीसी महासभा ने ऐलान किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
- साथ ही, सड़कों पर आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु का बयान
ओबीसी समाज के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने कहा कि सरकार ओबीसी और एससी-एसटी वर्गों के बीच टकराव पैदा करना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो विधायक और मंत्री ओबीसी वर्ग से बने हैं, उनसे उनके काम का हिसाब लिया जाएगा।
चुनाव पर पड़ेगा असर
ओबीसी महासभा ने चेतावनी दी कि आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों में इस फैसले का असर देखने को मिलेगा। समाज के लोगों ने सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की और कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इसका व्यापक विरोध होगा।
आदिवासी समाज का समर्थन
इस आंदोलन को आदिवासी समाज का भी समर्थन मिला है। आदिवासी नेताओं ने सरकार से ओबीसी वर्ग को आरक्षण बहाल करने की मांग की है।
प्रमुख मांगे:
- ओबीसी आरक्षण को बहाल किया जाए।
- पंचायत राज संशोधन अध्यादेश 2024 में बदलाव किया जाए।
- ओबीसी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
आंदोलन का असर:
सरकार के खिलाफ बढ़ते गुस्से के कारण आने वाले चुनावों में ओबीसी समाज की नाराजगी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बन सकती है। सरकार को इस मुद्दे पर तत्काल समाधान निकालने की जरूरत है।